जीआईसी वेदीखाल का जर्जर स्कूल भवन।
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कहने को बीरोंखाल विकासखंड के जीआईसी वेदीखाल को इसी वर्ष मॉडल स्कूल का दर्जा दिया गया था। लेकिन ताज्जुब है कि बारिश का मौसम शुरू होते ही बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। कारण, जर्जर हाल प्रत्येक कक्षों से पानी टपकता रहता है।
स्कूल की इस हालत को अभिभावक शिक्षक संघ हर मंच पर विद्यालय भवन की समस्या उठा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यह हाल तब है जब इस वर्ष सरकार की ओर से इस विद्यालय को मॉडल स्कूल घोषित किया गया है। अभिभावक शिक्षक संघ के अध्यक्ष शिशुपाल सिंह रावत और विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वीरपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि पंद्रह ग्राम पंचायतों के केंद्र स्थल में स्थित जीआईसी वेदीखाल को सरकार ने इस साल मॉडल स्कूल घोषित किया है। मॉडल स्कूल ऐसा है कि जहां बारिश होते ही बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। वर्ष 1947 में बनी स्कूल की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है कि हर कमरा बारिश के दौरान लबालब हो जाता है, जहां बैठना तो दूर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है।
कई साल से अटका है निर्माण कार्य
विद्यालय में 270 छात्र संख्या है। कई मंचों पर भवन की समस्या उठाने के बाद यहां रमसा के तहत चार कक्षा कक्षों के निर्माण को मंजूरी मिली, लेकिन उनका काम भी एक साल से लटका पड़ा है। भारी बरसात में भवन ढहने के कगार पर हैं। जनप्रतिनिधि क्षेत्रीय विधायक तीरथ सिंह रावत से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष दीप्ति रावत तक गुहार लगा चुके हैं। कांग्रेस संगठन में कद्दावर प्रदेश महामंत्री राजपाल सिंह भी स्कूल भवन का निर्माण का भरोसा दिला चुके हैं, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस हैं।
स्कूल भवन जर्जर हाल है। भारी बारिश में हादसे की आशंका के चलते बच्चों की छुट्टी कर देते हैं। रमसा के तहत चार कक्षा कक्षों के निर्माण की मंजूरी मिली है, लेकिन तब तक समस्या बनी रहेगी। बारिश में लेंटर टपक रहा है। उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया है।
- मनवर अग्रवाल, प्रधानाचार्य जीआईसी वेदीखाल