कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस वर्ष 20 मार्च को गौरया दिवस नहीं मनाया जाएगा। हालांकि पक्षी प्रेमियों को नि:शुल्क घौंसले दिए जाएंगे। साथ ही घर-घर और विभिन्न जगहों पर घौंसले भी लगाए जाएंगे।
भाबर क्षेत्र के अंतर्गत नंदपुर निवासी शिक्षक दिनेश चंद्र कुकरेती वर्ष 1997 से गौरया संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। वे घायल व असहाय पक्षियों का उपचार करने व बचाने का कार्य भी लगातार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पक्षी प्रेमी प्रतिवर्ष गौरया संरक्षण का कार्य देखने के लिए उनके घर आते हैं और उनसे पक्षियों के संबंध में विभिन्न जानकारियां भी प्राप्त करते हैं। जबकि जो लोग उनसे नहीं मिल पाते हैं वे फोन पर संपर्क कर पक्षी संरक्षण के संबंध में जानकारी देते हैं, लेकिन इस वर्ष कोरना वायरस के चलते गौरया दिवस नहीं मानाया जा रहा है। (संवाद)