यदि बरसात से अवरुद्ध चल रहा कांडई पुल-पगना मोटर मार्ग यातायात के लिए खुला होता, तो शायद 32 साल की गोदांबरी देवी असमय काल का ग्रास नहीं बनती और एक माह के दुधमुंहे शिशु के सिर से मां का साया नहीं उठता।
चमोली जिले के पगना गांव के वीरेंद्र सिंह की पत्नी गोदांबरी देवी ने मेडिकल कालेज लाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। विगत 12 जून को उसने गांव में ही एक बालक को जन्म दिया था। उसकी तीन वर्षीय बालिका भी है। 12 जुलाई को गोदांबरी की तबियत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे गांव में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में ले गए, जहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी ने उसे दवा देकर घर भेज दिया। लेकिन 12/13 की रात लगभग दो बजे गोदांबरी की तबियत फिर खराब हो गई। इस बार मामला गंभीर देखकर स्वास्थ्य कर्मी ने बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी।
दिक्कत यह थी कि कांडई पुल-पगना मोटर मार्ग पगना से 11 किलोमीटर आगे कांडई के निकट दो स्थान पर बोल्डर आने से अवरुद्ध है। गोदांबरी के जेठ पंचम सिंह ने बताया कि यह मलबा कुछ घंटों में उठाया जा सकता था, लेकिन लोनिवि पिछले 25-26 दिन से यह मलबा नहीं हटा सका है। सड़क बंद होने के कारण 13 जुलाई की सुबह स्थानीय लोग उसे पालकी (डंडों में कुर्सी बांधकर) में बैठाकर 11 किमी पैदल कांडई गांव तक लाए। सीएचसी कर्णप्रयाग पहुंचते-पहुंचते पौने बारह बज गए। कर्णप्रयाग में भी हालत में सुधार नहीं आने पर चिकित्सकों ने रात नौ बजे उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। कर्णप्रयाग से 108 में श्रीनगर मेडिकल लाते समय उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। पीड़ित वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यदि कर्णप्रयाग में चिकित्सक पहले ही बता देते और सड़क खुली होती, तो उनके बच्चों से मां नहीं बिछुड़ती।