बंदरों ने शनिवार को सरंक्षित श्रेणी के उल्लू को बुरी तरह से घायल कर दिया। आसपास के लोगों के हल्ला मचाने और पत्थर फेंकने पर बंदर उसे छोड़कर भाग गए। हालांकि तब तक बंदरों ने उसके पंखों को तोड़ डाला था। इससे उल्लू के दोबारा से उड़ने की संभावना क्षीण हो गई।
शनिवार को शहर में स्थित बांसवाड़ा मोहल्ले के बच्चों ने उल्लू को बंदरों के हाथों मेें देखा तो वह चिल्लाए। सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी बड़ी मुश्किल से उल्लू को बंदरों के चुंगल से छुड़ाकर उसे घर ले आए। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग को दी। विभागीय कर्मी उसे अपने साथ ले गए। प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि उल्लू वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के शिड्यूल चार के अंतर्गत संरक्षित पक्षी है। यह रात्रिचर प्राणी है। उन्होंने बताया कि पंखों का विकास धीमे-धीमे हड्डी के साथ होता है। बंदरों के हमले में उसकी हड्डियां भी टूट गई होंगी। ऐसी स्थिति में उसका भविष्य में उड़ना मुश्किल है।