मुख्यमंत्री बुधवार को धारी देवी मंदिर पहुंचे
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की ऊंचाई बढ़ाना ऐतिहासिक भूल थी। यह बहुत बड़ी गलती हुई है। इसके लिए वह मां धारी देवी से माफी मांगने आए हैं। भूल सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में राज्य सरकार केंद्र के संपर्क में है। मुख्यमंत्री बुधवार को धारी देवी मंदिर परिसर में पत्रकारों से मुखातिब थे।
उन्होंने करीब आधा घंटा धारी देवी में पूजा अर्चना की। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने मुख्यमंत्री से मंदिर के निर्माण कार्य में देरी होने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी 70 फीसदी घोषणाओं पर कार्य हो रहा है, जबकि भाजपा के मुख्यमंत्रियों का यह आंकड़ा 30 फीसदी ही है। उन्होंने देश के सभी मुख्यमंत्रियों के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा घोषणाएं की हैं, जिन पर कार्य हो रहा है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, घनसाली के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, डीएम चंद्रशेखर भट्ट, एसएसपी निवेदिता कुकरेती आदि मौजूद थे।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ मंदिर के भीतर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मंदिर की आस्था का पूरा ध्यान रखा। एसएसपी निवेदिता कुकरेती, सीओ धन सिंह तोमर सहित सभी अधिकारी मंदिर के भीतर बिना बेल्ट के पहुंचे। पुलिस अधिकारियों की इस पहल की वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं और पुजारियों ने सराहना की।
धारीदेवी के लिए सड़क मार्ग से प्रस्थान करते समय मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रास्ते में रुककर डुंगरीपंथ के ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मार्च माह में राजकीय हाईस्कूल दिखोल्यूं के उच्चीकरण की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा ग्रामीणों ने रेल परियोजना व जल विद्युत परियोजना के प्रभावितों की समस्याओं पर कार्रवाई किए जाने की मांग भी की। इस दौरान ब्लाक प्रमुख सुषमा नेगी व त्रिभुवन राणा मौजूद थे।