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एक बरसात भी नहीं झेल पाई हाथी सुरक्षा दीवार

Tue, 14 Jun 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
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वन विभाग की लापरवाही कुंभीचौड़ क्षेत्र के नागरिकों पर भारी पड़ रही है। बरसाती पानी के बहाव के चलते हाथी सुरक्षा दीवार टूट गई थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों की सुरक्षा के लिए दीवार निर्माण का कार्य नहीं हो रहा है। हाथियों का झुंड आबादी क्षेत्र में धमककर ग्रामीणों के खेतों को चट कर रहा है, साथ ही हाथी-मानव संघर्ष का भी खतरा बना हुआ है।  
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लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से वर्ष 2015 की शुरूआत में कुंभीचौड़-रामपुर क्षेत्र के हाथी आमद वाले क्षेत्रों में साढ़े 46 लाख रुपये में की लागत से हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई थी, लेकिन यह दीवार एक बरसात भी नहीं झेल पाई। बरसात में कुंभीचौड़ में एक जगह दीवार धराशायी हो गई तो दूसरी जगह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे हाथी आबादी क्षेत्र में धमक रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी बेखबर बने हुए हैं।

खेती को नुकसान, जान का भी खतरा
ग्राम प्रधान दीपक पांडे ने बताया कि पिछली बरसात में उनकी ग्रामपंचायत के अंतर्गत बनी हाथी सुरक्षा दीवार मुकेश तिवारी और मुकेश गौड़ के घर के पास दो जगह टूट चुकी है। आए दिन हाथी टूटी हुई दीवारों की जगह से आबादी में घुस रहे हैं। दिन ढलते ही हाथियों का झुंड लोगों की मेहनत से उगाई खेती को चट कर रहा है। घर के करीब घूम रहे हाथी से जान का खतरा भी बना हुआ है। कई बार वन अधिकारियों को इसकी लिखित और मौखिक  शिकायत की जा चुकी है, लेकिन विभाग आश्वासन देकर टाल देता है।
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कुंभीचौड़ में नहर के पास बरसात का पानी अधिक आने के कारण हाथी सुरक्षा दीवार के नीचे की मिट्टी बह गई थी जिसके कारण दीवार गिर गई थी। इस रास्ते हाथियों के आने की जानकारी नहीं है। बजट आते ही दीवार का निर्माण करा दिया जाएगा।
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नितीशमणी त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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