डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राज्य स्तरीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण महोत्सव-2019 के तीसरे दिन बाल वैज्ञानिकों ने मॉडलों के जरिए अपने विकसित वैज्ञानिक सोच का लोहा मनवाया। इस मौके पर संयुक्त निदेशक प्रदीप रावत ने कहा कि बाल वैज्ञानिकों के शोध, विज्ञान ड्रामा, मॉडल और प्रोजेक्टों का लाभ समाज और देश को मिलेगा।
शुक्रवार को जीआईसी कोटद्वार में आयोजित विज्ञान महोत्सव के तीसरे दिन का शुभारंभ एससीईआरटी के अपर निदेशक अजय कुमार नौडियाल, संयुक्त निदेशक प्रदीप रावत, उप निदेशक राय सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी मदन सिंह रावत ने संयुक्त रूप से किया। महोत्सव में जूनियर वर्ग में कृषि वानिकी, रोलिंग बेरियर, लाई-फाई, अर्थ एंड स्पेस साइंस, इंजीनियरिंग, मिनी फार्मर, एसटीईसी स्मार्ट सिटी एंड स्मार्ट विलेज, हस्त कौशल एवं व्यवसाय, औषधीय कृषि वातावरण विज्ञान, मेगलीव ट्रेन, वेक्यूम रोबोट, सॉलर हेलमेट आदि के मॉडलों का प्रदर्शन किया। एससीईआरटी और बाहर से आमंत्रित निर्णायकों ने छात्रों की ओर से प्रस्तुत मॉडलों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चे अपनी अनोखी प्रतिभा को दर्शा रहे हैं, इसका लाभ भविष्य में देश, दुनिया और समाज को अवश्य ही मिलेगा। डा. विजय मैठानी और डा. स्मिता बड़ोला ने दैनिक जीवन में विज्ञान, अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के डा. दीपक रावत ने तत्वों की आवर्त सारिणी, अमेरिका से आए उत्तराखंड के वैज्ञानिक डा. विनीत ध्यानी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर प्रोजेक्टर के माध्यम से व्याख्यान दिए। इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी दुगड्डा लखपत खुगशाल, एससीईआरटी के राज्य समन्वयक विनोद प्रकाश सेमवाल, जिला समन्वयक मंगल सिंह चौहान, सह संयोजक प्रधानाचार्य जगमोहन सिंह रावत, रविंद्र सिंह रावत, रेणू नेगी, सुशील शुक्ला, शंकर दत्त गौड़, बृजमोहन ममगाईं, यशवंत बिष्ट, सुषमा दास, बीना मित्तल, धर्मपाल सिंह बिष्ट, सिद्धार्थ कोटनाला, शैलेंद्र पांथरी, गिरीश खर्कवाल आदि मौजूद रहे।