राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार से दैनिक वेतन पर कार्य कर रहे एकमात्र इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं समाप्त होने के बाद अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल के जनरेटरों, ऑक्सीजन प्लांट के संचालन और बिजली संबंधी खराबी आने पर अस्पताल प्रबंधन को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है जिसका असर अस्पताल में भर्ती और जांच कराने वाले मरीजों पर पड़ रहा है।
गत 30 जून को डीएम के आदेश पर वर्षों से बेस अस्पताल में कार्यरत 18 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के साथ बेस अस्पताल के एकमात्र इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं जिसके बाद अस्पताल के जनरेटर संचालन, ऑक्सीजन प्लांट और अस्पताल की बिजली व्यवस्था को देखने वाला कोई नहीं है। जनरेटर और बिजली लाइन में खराबी आने के कारण लोगों को डिजिटल एक्सरे, सिटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांचें प्रभावित हो रही हैं।
अशोक खंतवाल, शिवचरण सैनी, दीपक सिंह और मोहन सिंह रावत ने जिला प्रशासन पर बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं को बिगाड़ने का आरोप लगाया। कहा कि 300 बेड वाले अस्पताल में एक भी इलेक्ट्रीशियन का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। वर्षों से दैनिक वेतन पर एकमात्र इलेक्ट्रीशियन कार्य कर रहा था। उसे भी जिला प्रशासन के आदेश पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। ऐसे में अस्पताल की बिजली व्यवस्था में खराबी आने पर एक्स-रे से लेकर एमआरआई और वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था तक ठप हो जाती है। उन्होंने सरकार से बेस अस्पताल में इलेक्ट्रीशियन का पद सृजित करने और डीएम से निकाले गए इलेक्ट्रीशियन को वापस कार्य पर रखने की मांग की।
अस्पताल में दैनिक वेतन पर कार्यरत एकमात्र इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं समाप्त होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में इलेक्ट्रीशियन की तैनाती के लिए जिलाधिकारी से लिखित आग्रह किया गया है। - डॉ. केए तिवारी, पीएस बेस अस्पताल कोटद्वार।