पत्रकार वार्ता करते लैंसडौन के विधायक दलीप रावत।
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दो पक्षों के बीच हुई मारपीट और विवाद के बाद हुए बवाल में दर्ज मुकदमे में हिंदू संगठनों से जुड़े 27 लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। मामले में कोर्ट की ओर से इन लोगों के गैरजमानती वारंट (एनबीडब्लू) जारी कर पुलिस को गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। बुधवार को मामले की अगली सुनवाई होनी है।
28 सितंबर, 2015 की रात कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक मारपीट और विवाद के बाद अगले दिन कोटद्वार शहर में बवाल और तोड़फोड़ की घटना हुई थी। मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से बलबा समेत विभिन्न धाराओं में मोहित कुकरेती समेत हिंदू संगठनों के 27 लोगों को नामजद किया गया। करीब एक साल बाद 15 सितंबर, 2016 को तत्कालीन सरकार ने इस मुकदमे को जनहित में वापस लेने का शासनादेश जारी कर दिया था। सरकार का यह आदेश जिलाधिकारी गढ़वाल और अभियोजन पक्ष के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे जनहित में नहीं मानते हुए अभियोजन पक्ष के प्रार्थनापत्र को स्वीकार नहीं किया। अब करीब साढ़े तीन साल बाद इस मामले में सभी 27 आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्लू जारी होने से हिंदू संगठनों में हड़कंप मचा है।
हिंदू संगठनों के समर्थन में कूदे लैंसडौन के विधायक
कोटद्वार। हिंदू संगठनों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार के लिए लैंसडौन के विधायक दलीप रावत ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। पत्रकारों से बातचीत में विधायक ने कहा कि यदि हिंदू संगठनों के लोग गिरफ्तार किए जाते हैं तो वह भी कोतवाली में गिरफ्तारी देंगे। उन्होंने कहा कि अब वह प्रदेश सरकार से इस मामले में नए सिरे में पैरवी करने की मांग करेंगे। आरोप लगाया कि यदि मामले में तत्कालीन कांग्रेस सरकार सही ढंग से पैरवी कर लेती तो हिंदू संगठनों के लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार नहीं लटकती।