केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में प्रदर्शित गढ़वाली फिल्म ‘सुबेरो को घाम’ (सुबह की धूप) संदेश देने में सफल रही। हालांकि शादी-ब्याह का सीजन और समय पर प्रचार प्रसार नहीं होने से फिल्म देखने कम लोग ही पहुंचे। जबकि फिल्म के दोनों शो नि:शुल्क रखे गए थे।
बुधवार को मोहन काला फाउंडेशन के सहयोग से स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह मे ‘सुबेरो को घाम’ फिल्म का प्रदर्शन हुआ। पहाड़ में सामाजिक और व्यक्तिगत आयोजनों में शराब के बढ़ते प्रचलन और इसके विरोध में महिला के संघर्ष पर आधारित इस फिल्म के प्रदर्शन से पहले सभा आयोजित की गई।
इस मौके पर समाजसेवी मोहन काला ने कहा कि युवा वर्ग को अपनी माटी से जुड़कर उससे रूबरू होना चाहिए। इसीलिए फिल्म नि:शुल्क दिखाई जा रही है।
फिल्म की निर्मात्री, निर्देशक और अभिनेत्री उर्मि नेगी ने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों मेें लगभग सभी सिनेमा हॉल बंद हो गए हैं। इससे लोग कई बेहतर फिल्में देख नहीं पा रहे हैं। सिनेमा हॉल संस्कृति के प्रचार-प्रसार और जनसमस्याओं को उठाने का सशक्त माध्यम हैं।
फिल्म के किरदार रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने चिंता जताई कि वर्तमान में उत्तराखंडी सिनेमा के लिए सरकारें कुछ प्रयास नहीं कर रही हैं। कार्यक्रम का संचालन अदिति न्यास के संस्थापक गिरीश पैन्यूली ने किया। इस मौके पर संगीतकार अमित सागर, प्रशांत थपलियाल, महेश गिरी, दीपक बिष्ट व अमन रावत आदि उपस्थित थे।