कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) के लैंसडौन कार्यालय का सामान कोटद्वार ले जाने पर भड़के राज्य आंदोलनकारियों ने सामान से लदे वाहनों को जबरन रोक दिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद वाहनों से सामान वापस कार्यालय में डलवाने के बाद आंदोलनकारी शांत हुए।
रविवार को सुबह नौ बजे कालागढ़ टाइगर रिजर्व कार्यालय के बाहर उस समय हंगामा मच गया, जब लोगों ने कार्यालय का पूरा फर्नीचर, फाइलें, कंप्यूटर आदि एक ट्रक ओर एक अन्य वाहन में लदा हुआ देेखा। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों के साथ राज्य आंदोलनकारी मौके पर पहुंच गए। राज्य आंदोलनकारी महिपाल सिंह रावत और कुलदीप कुमार ने वहां मौजूद कार्यालय के कर्मचारियों से सामान ले जाने और कार्यालय शिफ्टिंग के आदेश के बारे में पूछने पर वे उचित जवाब नहीं दे सके। प्रभागीय वनाधिकारी किशन चंद्र ने मोबाइल पर बताया कि कार्यालय स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। कोविड के दौरान कर्मचारियों को लैंसडौन आने जाने पर परेशानियां हो रही हैं, इसलिए कार्यालय का कामकाज कोटद्वार से सुचारु कराने के लिए कार्यालय की फाइलें कोटद्वार पहुंचाई जा रही हैं। उनसे यह पूछे जाने पर कि कार्यालय का फर्नीचर व अन्य बुक सेल्फ अलमारियां वाहन में क्यों लादी गई है। इस बात का वे जवाब नहीं दे सके। जिस पर राज्य आंदोलनकारियों ने गुपचुप तरीके से कार्यालय को कोटद्वार शिफ्ट किए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया। वे स्थानांतरण के आदेश दिखाने के बाद ही वाहन को यहां से जाने की बात पर अड़ गए। जिस पर प्रभागीय वनाधिकारी किशन चंद्र ने कर्मचारियों को वाहनों में लादे गए सामान को वापस कार्यालय लाकर यथा स्थिति कायम रखने के निर्देश दिए। इसके बाद मामला शांत हुआ।
लैंसडौन विधायक ने दी वन मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी
लैंसडौन विधायक दिलीप रावत ने केटीआर के कार्यालय को कोटद्वार शिफ्ट किए जाने का विरोध जताया। कहा कि विधानसभा क्षेत्र से कार्यालय को अन्यत्र ले जाने का प्रयास जनता के साथ धोखा है। इस मामले मेे साजिश की बू नजर आ रही है, जिसका हर कीमत पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कार्यालय को अन्यत्र ले जाने पर वन मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।