कड़े प्रशिक्षण के बाद 18 सहायक सेनानी दीक्षांत समारोह (पासिंग आउट परेड) में शपथ ग्रहण करने के बाद विधिवत एसएसबी का हिस्सा बन गए हैं। शुक्रवार को एसएसबी अकादमी परिसर में आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू, एसएसबी की महानिदेशक अर्चना रामासुंदरम और अकादमी निदेशक आईजी एस बंदोपाध्याय ने दीक्षांत परेड की सलामी ली।
मुख्य अतिथि के आगमन के बाद राष्ट्रगान की धुन के बीच परेड स्थल पर राष्ट्र ध्वज और एसएसबी के ध्वज लाए गए। सेनानायक (कमांडेंट) संजय कुमार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को देश सेवा की शपथ दिलाई।
गृह राज्य मंत्री और महानिदेशक ने परेड का निरीक्षण किया। परेड का नेतृत्व सहायक कमांडेंट अजीत सिंह ने किया। परेड में छह माह का प्रशिक्षण प्राप्त 84 नव आरक्षियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों का साथ दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि रिजिजू ने बल में शामिल होने वाले अधिकारियों के परिजनों को बधाई दी। कहा कि एसएसबी संवेदनशील चौकियों में बखूबी अपना काम कर रही है। नेपाल और भूटान मित्र देश हैं, ऐसे में एसएसबी को सामान्य से अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यदि सूचना तंत्र मजबूत हो, तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
एसएसबी की महानिदेशक अर्चना रामासुंदरम ने कहा कि जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे के पहला कदम उठाने पर प्रफुल्लित होती है, उसी प्रकार वह प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण पूर्ण होने पर खुश हैं। उन्हें विश्वास है कि अधिकारी देश के नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।
एसएसबी के निदेशक बंदोपाध्याय ने अकादमी के कार्यों और प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण के बारे में बताया। अंत में मुख्य अतिथि ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सहायक सेनानियों को पुरस्कृत किया। इस मौके पर अधिकारियों और परिजनों ने नवागुंतक अधिकारियों के कंधों पर सितारे सजाए। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष विपिन चंद्र मैठानी, केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेएल कौल और राजकीय मेडिकल कालेज की पूर्व प्राचार्य प्रो. आईएस योग आदि मौजूद थे।
इस बार अधिकारियों की संख्या काफी कम
इस बार सिर्फ 18 सहायक सेनानी एसएसबी में शामिल हुए हैं। जबकि पिछली बार 108 अधिकारी एसएसबी को मिले थे। नवांगुतक अधिकारियों में 11 लोक सेवा आयोग की सीधी भर्ती और 7 विभागीय भर्ती परीक्षा के माध्यम से मिले हैं। इनको क्रमश: 52 और 28 सप्ताह का गहन प्रशिक्षण दिया गया है।
उत्तराखंड से एक भी नहीं
इस बार उत्तराखंड से एक भी अधिकारी एसएसबी को नहीं मिल पाया। जबकि पिछले वर्ष तीन होनहार सहायक सेनानी बने थे। हर साल उत्तराखंड के युवा काफी संख्या में सेना और सुरक्षा बलों में जाते रहे हैं। सर्वाधिक अधिकारी बिहार से हैं। यहां से 8 युवा सहायक सेनानी बने हैं।
खाना पकाने के तरीके देखे
एसएसबी के जवानों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू के समक्ष जंगल व वीरान स्थलों में खाना पकाने के तरीकों का प्रदर्शन किया। जवानों ने अंगारों, पत्थरों, मिट्टी और पानी में चावल, मांस और सब्जी पका कर दिखाई। रिजिजू ने पके हुए भोजन को भी चखा।
अजीत को मिला सोर्ड आफ आनर
सोर्ड ऑफ आनर (सर्वोत्तम प्रशिक्षणार्थी) से सम्मानित सहायक सेनानी अजीत सिंह को तीन पुरस्कार मिले। उन्हें बेहतरीन आउटडोर व सर्वोत्तम निशानेबाज का भी पुरस्कार मिला। सहायक सेनानी अमन कुमार को बेहतरीन इनडोर और सहायक सेनानी सुमन सौरभ को ओवर आल बेस्ट ट्रेनी (सबसे अच्छा प्रशिणार्थी) का पुरस्कार मिला।
वायु सेना को भी दे चुके हैं सेवा
सोर्ड ऑफ ऑनर सहित तीन पुरस्कार झटकने वाले अजीत सिंह उत्तर प्रदेश के जगहेड़ी (मुजफ्फरनगर) के रहने वाले हैं। उनके पिता राजकुमार तहसील मुजफ्फरनगर में अमीन के पद पर कार्यरत हैं। जबकि माता राजेश देवी गृहणी हैं।
सामान्य घर से ताल्लुक रखने वाले अजीत लगन और कड़ी मेहनत बलबूते ना सिर्फ सुरक्षा बल में अधिकारी बने, बल्कि एसएसबी में प्रशिक्षण के दौरान सर्वोत्तम प्रशिक्षणार्थी का पुरस्कार हासिल किया। अजीत एसएसबी में आने से पहले वायु सेना में कॉरपोरल पद पर तैनात थे। सुरक्षा बल में अधिकारी बनने की जिद उन्हें एसएसबी में ले आई। उन्होंने लोक प्रशासन में स्नातक किया है।
एसएसबी में निरीक्षक थे सुमन
ओवर आल बेस्ट ट्रेनी का पुरस्कार प्राप्त करने वाले सुमन सौरभ विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से सहायक सेनानी बने हैं। इससे पहले वह एसएसबी में निरीक्षक पद पर तैनात थे। बिहार के नालंदा जिले के निवासी सुमन के पिता कपिल देव नारायण सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। जबकि माता सरस्वती देवी गृहणी हैं। सुमन के दो बच्चे हैं। माता-पिता के बुजुर्ग होने और होली के चलते उनके परिजन समारोह में नहीं पहुंच पाए।
बीटेक हैं अमन
बेहतरीन इनडोर से पुरस्कृत अमन नोएडा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। उनके पिता अशोक कुमार ओएनजीसी में कार्यरत हैं और माता रजनीबाला शिक्षिका हैं। सूचना तकनीकी से बीटेक करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा/सेना की तैयारी की।
हिमांशु सबसे कम उम्र के अधिकारी
25 वर्षीय हिमांशु दुबे अपने बैच के सबसे कम उम्र के सहायक सेनानी हैं। वह इलाहाबाद के रहने वाले हैं। बीटेक के बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी। उसमें वह प्रथम बार में सफल रहे। उन्होंने बताया कि उनका ख्वाब था कि वर्दी पहनकर देश सेवा करुं।
यह है स्थिति
राज्य संख्या
बिहार 8
उत्तर प्रदेश 5
आसाम 1
हरियाणा 1
पश्चिमी बंगाल 1
महाराष्ट्र 1
झारखंड 1