वेतन भुगतान, राजकीयकरण, प्रधान प्रबंधक को हटाने, कालागढ़ अपमिश्रित दूध प्रकरण की जांच और नोडल केंद्र को पुन: श्रीनगर से संचालित करने की मांग के लिए आंदोलित कर्मियों ने सहकारी दुग्ध संघ (आंचल डेरी) की दुग्धशाला में भी काम ठप कर दिया है। हालांकि शनिवार सुबह वाहन से दूध की बिक्री हुई, लेकिन हड़ताल से दुग्ध संग्रहण और पैकिंग नहीं होने से रविवार से उपभोक्ताओं को दूध नहीं मिल पाएगा। इधर, पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सहकारी दुग्ध कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है।
आंचल डेरी कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष शर्मा आठ मार्च से अनशन कर रहे हैं। 10 मार्च से कर्मचारी भी पूर्ण रूप में कार्यालय कार्य बहिष्कार पर थे। अब शनिवार से उन्होंने दुग्धशाला में उत्पादन, उपार्जन और विपणन भी बंद कर दिया। संगठन के सचिव एसडी गार्गी और संरक्षक जीपी गिरी ने बताया कि 18 मार्च को दुग्ध संघ बोर्ड की अध्यक्ष सतेश्वरी कैंथोला और यूसीडीएफ संचालक बैजंती देवी ने वार्ता की, लेकिन कर्मी प्रधान प्रबंधक को हटाने पर अड़े रहे। शनिवार को मेडिकल टीम ने शर्मा का स्वास्थ्य परीक्षण किया। उनके रक्त में कीटोन पाए गए। जबकि शुक्रवार की तुलना में उनका वजन 300 ग्राम गिरा।
आंचल डेरी के प्रधान प्रबंधक जीएस मौर्य और कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा के बीच चल रहा विवाद बढ़ता जा रहा है। मौर्य ने पुलिस को तहरीर देते हुए शर्मा से जानमाल का खतरा बताया है। उन्होंने बताया कि 18 मार्च को दुग्ध अध्यक्ष सतेश्वरी कैंथोला आंचल डेरी में वार्ता के लिए पहुंची थी। तब शर्मा उनकी ओर मारने के लिए दौड़े। वहीं, शर्मा का कहना है कि प्रधान प्रबंधक उच्चाधिकारियों सहित पुलिस-प्रशासन को गलत जानकारी दे रहे हैं। आमरण अनशन पर होने से वह चलने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में वह हाथापाई कैसे कर सकते हैं?