दुगड्डा ब्लाक के सिमलखेत धार गांव के एकांत एवं निर्जन स्थान में जीर्ण-शीर्ण पड़े एक घर में रह रहे छह भाई बहन अपने भरण पोषण में मदद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। माता-पिता का साया सिर से उठ जाने से ये बच्चे दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
20 वर्षीय दाताराम अपने छह भाई बहनों में सबसे बड़ा है और उसकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट है, लेकिन, गरीबी और पांच भाई बहनों की जिम्मेदारी की वजह से वह आगे पढ़ने की बजाए मजदूरी करने को मजबूर है। जिम्मेदारी सिर्फ पेट पालने की ही नहीं बल्कि बहन की शादी की भी है। बहन का रिश्ता उसके माता-पिता जीवित रहते कर गए थे। दाताराम का कहना है कि छोटी बहिन कविता (18) की शादी उसके सामने पहाड़ सी चुनौती है। उसने सरकार और समाजसेवी संगठनों से मदद की गुहार लगाई है। दामोदर और कविता के अलावा परिवार में रोशन सिंह (17), ममता (15), संगीता (12) और कैलाश सिंह (11) है । ब्यूरो