कोटद्वार। श्री सिद्धबली महोत्सव के अंतिम दिन सिद्धबाबा, गुरु गोरखनाथ, मां भगवती, बदरीनाथ, हनुमान, नरसिंग, डांडा नागराजा, डौंड्या, भैरव के जागरों से सिद्धोंं का डांडा गुंजायमान हो गया। श्रद्धालुओं ने जागरों का श्रवण कर मन्नतें मांगीं। वहीं, भैरों और नरसिंह देवता के पाश्वा जलते अंगारों पर नाचे।
सिद्धबली महोत्सव के अंतिम दिन यज्ञशाला परिसर में जागरों का आयोजन किया गया जिसमें लैंसडौन बिंतल गांव से पहुंचे जागरी सवेंद्र कुकरेती, हरीश भारद्वाज और मंगी लाल ने कई जागर गाए। जागरों के बाद महंत दिलीप रावत ने सवा मन रोट का प्रसाद काटा और सिद्धबाबा को इसका भोग लगाया। इससे पूर्व रविवार को सिद्धबली महोत्सव के अंतिम दिन सुबह आचार्य देवी प्रसाद भट्ट के सान्निध्य में 14 वेद पाठियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पिंडी महाभिषेक किया। इसके बाद एकादश कुंड में मेला संयोजक उद्योगपति अनिल कंसल, महंत दिलीप रावत, मंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. जेपी ध्यानी, पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व मेयर हेमलता नेगी के अलावा मंदिर समिति के सभी पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति दी। संवाद