कोषागार कर्मियों की हड़ताल से शुरू हुई स्टांप पेपर की कमी की परेशानी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। दस और बीस रुपये के स्टांप पेपर के न मिलने से लोगाें को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि तहसील परिसर में काम कराने आए लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि कई स्टांप वेंडरों ने छोटे स्टांप पेपरों की कालाबाजारी शुरू कर दी है। दस रुपये के स्टांप तीस से चालीस रुपये में दिए जा रहे हैं। हाल यह है कि सरकार द्वारा शुरू की गई ई-स्टांपिंग प्रणाली में भी दस रुपये का स्टांप बीस से पच्चीस रुपये में मिल रहा है।
बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष आशुतोष देवरानी, मुकेश थपलियाल, अखिलेश घिल्डियाल, विनोद भट्ट, बिजेंद्र राणा, सुधाकर बडोला का कहना है कि छोटे स्टांप की कालाबाजारी हो रही है जिस पर अकुंश लगाया जाना चाहिए।
छोटे स्टांप पेपरों की किल्लत दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। हरिद्वार से दस रुपये के पांच हजार स्टांप पेपर मंगवा दिए गए हैं। तहसील में दो वेंडरों को ई-स्टांपिंग के लिए अधिकृत किया गया है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक में भी ई-स्टांपिंग सुविधा प्रदान की गई है। ई-स्टांप पेपर में एक स्टांप पेपर का स्टेशनरी चार्ज दस रुपये आ रहा है, ऐसे में दस रुपये का स्टांप स्टेशनरी चार्ज समेत बीस रुपये में दिया जा रहा है। बड़े स्टांप पेपरों पर भी दस रुपये स्टेशनरी शुल्क लिया जाएगा।
- ललित मोहन जुयाल, कोषाधिकारी कोटद्वार