शारदीय नवरात्र का विधिवत शुभारंभ हो गया। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर घरों में हरियाली बोई और माता की विधिवत पूजा अर्चना की। इस अवसर पर क्षेत्र के देवी मंदिरों में माता के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ लगी रही। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आदिशक्ति के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना की और अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
रविवार को सुबह होते ही श्रद्धालुओं ने घरों और देवी मंदिरों में नवदुर्गा प्रार्थना, देवी कवच, आरती, भजन-कीर्तन आदि आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए। कोटद्वार के सिद्धपीठ सुखरो देवी मंदिर, सिंदूरा देवी मंदिर, नव दुर्गा मंदिर, संतोषी माता मंदिर, श्रीसिद्धबली बाबा मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, गीता भवन मंदिर, बालाजी मंदिर, दुगड्डा स्थित दुर्गा देवी मंदिर में देवी की पूजा अर्चना और दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इस अवसर पर कथा वाचक आचार्य सुधीर ध्यानी ने बताया कि पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण देवी के प्रथम स्वरूप का नाम शैलपुत्री पड़ा। देवी के इस स्वरूप को योगमाया भी कहा जाता है।
धुमाकोट में शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन लोगों ने व्रत धारण कर कलश स्थापना के साथ घरों में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। क्षेत्र के बड़ी दीवा, छोटी दीवा मंदिर, गुजड़ूगढ़ी मंदिर, धूमादेवी मंदिर धुमाकोट, दुर्गा मंदिर अदालीखाल, बूंगी देवी, भौन देवी आदि देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसके अलावा लैंसडौन के किंगकालेश्वर मंदिर, यमकेश्वर दुर्गा मंदिर, महाबगढ़ मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना की।
कोटद्वार के सिद्धपीठ सुखरो देवी मंदिर में माता के दर्शनों को लगी श्रद्धालुओं की लाइन।- फोटो : KOTDWAR