कोटद्वार में भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत अब कांग्रेस की नाव पर सवार हो गए हैं। कांग्रेस ने उन्हें यमकेश्वर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। शैलेंद्र रावत कोटद्वार में जहां स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के लिए काम करेंगे, वहीं नेगी यमकेश्वर में उनकी जीत के खेवनहार होंगे।
ताजा घटनाक्रम से यमकेश्वर में सभी पुराने समीकरण बदल गए हैं। वहां से पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल और प्रशांत बडोनी ने निर्दलीय ताल ठोककर भाजपा को परेशानी में डाल दिया है, जबकि कांग्रेस नेत्री रेणू बिष्ट ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर कांग्रेसी खेमे में हलचल मचा दी है।
वर्ष 2007 में कोटद्वार विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह नेगी को हराने वाले पूर्व भाजपा विधायक शैलेंद्र सिंह रावत बदले हालात में अब उनके चुनावी रथ पर सवार हो गए हैं। भाजपा द्वारा कोटद्वार सीट पर लगातार दूसरी बार टिकट काटे जाने से क्षुब्ध शैलेंद्र रावत चार दिन पूर्व पार्टी से इस्तीफा देकर अलग राह चुन चुके थे। रविवार को कांग्रेस द्वारा जारी प्रत्याशियों की सूची में उन्हें यमकेश्वर से टिकट दिए जाने से पूर्व में लगाए गए कयास अब सच होकर सामने आ गए हैं।
यमकेश्वर सीट शैलेंद्र सिंह रावत के लिए एकदम नई होगी। हालांकि दुगड्डा ब्लाक प्रमुख रहते हुए इस सीट के एक बड़े हिस्से से वह भलीभांति वाकिफ हैं। वर्ष 2012 में हुए नए परिसीमन में पुरानी कोटद्वार सीट का भी एक बड़ा भाग अब यमकेश्वर विधानसभा का हिस्सा बन चुका है। इसका लाभ उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है।
अब तक कोटद्वार से चुनाव की तैयारी में जुटे शैलेंद्र रावत के लिए यमकेश्वर सीट चुनौतीपूर्ण होगी। पूर्व ब्लाक प्रमुख रेनू बिष्ट के चुनाव मैदान में आने से इस सीट के चुनावी समीकरण प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता।