पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। एक ओर जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बरसात का पानी कहीं दुकानों में घुस रहा है तो कहीं घरों में। पानी के साथ मलबा भी बहकर सड़कों पर आ जा रहा है।
भारी बारिश के कारण एक मकान का आगे का हिस्सा ढह गया। हालांकि, इसमें लोग बाल-बाल बच गए। कोई हानि नहीं हुई। सतपुली के नयारघाटी में नासूर बन चुके डिग्री कॉलेज गदेरा ने एक बार फिर उफान पर आकर लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। रविवार शाम सात बजे मार्ग पर पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आने से सुबह कई घंटे के लिए मार्ग बंद रहा। इसके बाद भी पानी और मलबा आता रहा जिससे वाहनों के साथ ही राहगीर भी परेशान रहे। कई जगह नालियां चोक हो गईं। बरसाती पानी दुकानों और घरों में घुस गया।
जयहरीखाल ब्लाक के अंतर्गत ग्राम गुड़ेथा निवासी बुद्धे सिंह और उसका परिवार रविवार रात दस बजे अपने घर में सो रहे थे। तभी तेज आवाज के साथ मकान के आगे का हिस्सा धराशायी हो गया। मकान गिरने की आवाज को सुनकर सभी की नींद खुली। बाहर झांकते ही उनके होश उड़ गए। उनके मकान का आधा हिस्सा टूट चुका था। घर का सामान मलबे में दब गया था। बुद्धे सिंह ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। पटवारी पीतांबर सिंह रावत ने बताया कि उन्हें पोखरी में मकान का एक हिस्सा गिरने की सूचना मिली है। मौका मुआयना कर इसकी जांच करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तेलीसोत गदेरे के रपटे में फंस रहे वाहन
भाबर रोड पर किशनपुर-चिलरखाल मार्ग पर तेलीसोत गदेरे के रपटे पर बरसात के दौरान आवाजाही खतरे से खाली नहीं है। पर्वतीय क्षेत्र में भारी बारिश के चलते जहां यह गदेरा उफना कर बहता है। क्षेत्रवासी लंबे समय से इस रपटे पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन लोनिवि और सरकार लोगों की इस मांग को अनसुना कर रहे हैं।
रामदयालपुर निवासी कुंवर सिंह, आनंद सिंह गुसाईं, विमल प्रसाद शुक्ला, नत्थी प्रसाद केष्टवाल, बीरेंद्र प्रसाद, विद्यादत्त केष्टवाल, मदन सिंह मेहरा, रमेश सिंह, दाताराम केष्टवाल का कहना है कि तेलीसोत गदेरा हर बरसात के मौसम में परेशानी का सबब बनता है। इसी मार्ग से छोटे-बड़े वाहन चिलरखाल होते हुए लालढांग, हरिद्वार, सिगड्डी सिडकुल समेत कई कई गांवों के लिए जाते हैं। ईई लोनिवि दुगड्डा राजेश चंद्र ने कहा कि तेलीसोत रपटे पर पुल निर्माण के लिए प्रथम चरण की स्वीकृति है। नदी के समानांतर बनी दो सड़कें पुल निर्माण में दिक्कत कर सकते हैं। इस पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है। यहां पर तीस मीटर स्पान का पुल बनाना प्रस्तावित है।