कोटद्वार। महाशिवरात्रि पर्व के साथ ही कांवड़ यात्रा का समापन हो गया। कोटद्वार से दिल्ली और हरिद्वार-देहरादून रूट पूरी तरह खुलने से रोडवेज डिपो प्रशासन ने राहत की सांस ली। बीते एक सप्ताह तक कांवड़ यात्रा के दौरान सूझबूझ से बसों के संचालन से डिपो की आय में मामूली गिरावट आई।कोटद्वार से देहरादून के लिए निगम की पांच एवं अनुबंधित 12 बसों का संचालन होता है। कोटद्वार-हरिद्वार के बीच अतिरिक्त बसों को चलाया जाता है। वहीं, दिल्ली रूट पर निगम व अनुबंधित समेत 30 से 32 बसें दिल्ली के लिए संचालित होती हैं। 19 से 26 फरवरी तक कांवड़ यात्रा मार्ग पर नजीबाबाद से हरिद्वार मार्ग पर बसों का संचालन रोक दिया गया था। कोटद्वार से हरिद्वार, देहरादून जाने वाली बसों को नजीबाबाद में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। वहीं, कोटद्वार से दिल्ली जाने वाली बसों को भी नजीबाबाद से चार किलोमीटर पहले रोका जा रहा था। बसें चलाने के लिए एकमात्र वैकल्पिक मार्ग नहर बाईपास था। इस मार्ग से गुजरने पर कोटद्वार की बसें नजीबाबाद से कट गईं। दोनों ही महत्वपूर्ण रूट पर बसों का संचालन अवरुद्ध होने से डिपो की आय गिरने की आशंका थी।
एआरएम अनुराग पुरोहित ने बताया कि बृहस्पतिवार को आय का आकलन किया गया, तो पता चला कि सामान्य दिनों की अपेक्षा आय में 50-60 हजार रुपये की ही गिरावट आई है। हरिद्वार, देहरादून के लिए चिलरखाल-लालढांग मार्ग से बसें चलाने, रोडवेज कर्मियों की हर समय उपलब्धता सुनिश्चित करने और दिल्ली रूट पर नजीबाबाद को छोड़कर शेष सभी बस अड्डों पर ठहराव अनिवार्य करने का लाभ मिला।
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डग्गामार वाहन चालकों ने मौका भुनाया
कोटद्वार से नजीबाबाद और नजीबाबाद से हरिद्वार तक संचालित होने वाले प्राइवेट सवारी वाहनों के चालकों ने इस मौके को भुनाया। समय से गंतव्य तक पहुंचाने के नाम पर इन वाहन चालकों ने यात्रियों से दोगुना तक किराया वसूल किया। इन पर किसी तरह का अंकुश नहीं रहा।