अपना भवन भी नहीं, पर्यटन विभाग के भवन में संचालित हो रही उप तहसील
नेटवर्क नहीं होने से 80 किलोमीटर दूर लैंसडौन के लगाने पड़ रहे हैं चक्कर
कोटद्वार। रिखणीखाल उप तहसील में नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से क्षेत्रवासियों को प्रमाणपत्र व अन्य कार्यों को करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि क्षेत्र की 81 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए करीब 80 किमी दूर लैंसडौन तहसील के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। यही नहीं उप तहसील बनने के दस साल बाद भी पूर्ण तहसील का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिससे यहां स्थायी अधिकारियों की तैनाती भी अभी तक नहीं हो पाई है।
वर्ष 2016 में रिखणीखाल में उप तहसील बनाने की घोषणा हुई थी। उप तहसील में रिखणीखाल ब्लॉक की 81 ग्राम पंचायतों के 190 गांवों को शामिल किया गया। उप तहसील का संचालन पहले लोनिवि के गेस्ट हाउस में होता रहा। दो साल पहले उप तहसील को रिखणीखाल मुख्य बाजार में पर्यटन विभाग के भवन में शिफ्ट कर दिया गया।
उप तहसील बनने के दस वर्ष बाद भी उसे पूर्ण तहसील का दर्जा नहीं मिल पाया है जिससे उप तहसील प्रशासनिक तौर पर आरके व राजस्व उपनिरीक्षक के भरोसे है। ग्राम पंचायत कांडा की प्रधान बिनीता ध्यानी का कहना है कि उप तहसील में इंटरनेट की स्थायी व्यवस्था के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है।
कंपनी द्वारा सर्वे कर लिया गया है। जल्द ही रिखणीखाल उप तहसील में इंटरनेट की व्यवस्था कर दी जाएगी। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र समेत अन्य प्रमाणपत्रों के लिए रिखणीखाल उप तहसील में दो दिन तहसीलदार बैठते हैं।
- शालिनी मौर्य, एसडीएम लैंसडौन।