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तीन साल से नहीं हुई सिंचाई नहरों की मरम्मत, काश्तकार परेशान

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नगर निगम बनने के तीन साल बाद भी मुख्य नहरों के साथ ही गांवों की सिंचाई गूलों की मरम्मत न होने से काश्तकार परेशान हैं। सिंचाई विभाग ने आपदा में क्षतिग्रस्त इन नहरों और गूलों को दुरुस्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। काश्तकारों का आरोप है कि नगर निगम बनने के बाद इसमें शामिल गांवों में नहरों और गूलों की मरम्मत के लिए तीन साल से पैसा आवंटित नहीं हो रहा है, जिससे काश्तकारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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8 दिसंबर, 2017 को प्रदेश सरकार ने सनेह समेत कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 राजस्व गांवों को नगर पालिका में शामिल करते हुए नगर निगम बना दिया। निगम बनने के तीन साल बाद भी काश्तकारों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायतों के समय में बड़ी नहरों और सिंचाई गूलों के रखरखाव व मरम्मत का कार्य सिंचाई विभाग करती थी। इसके लिए ग्राम पंचायतों को मनरेगा, नाबार्ड और ब्लॉक से बजट मिल जाता था, लेकिन नगर निगम बनने के बाद इन मदों से बजट मिलना बंद हो गया। तभी से सनेह, सुखरो और भाबर की सिंचाई गूलों की स्थिति बदहाल हो गई। काश्तकार तीन साल से क्षेत्र की सिंचाई गूलों की मरम्मत और सफाई की मांग करते आ रहे हैं। काश्तकार ज्ञान सिंह नेगी, जेपी बहुखंडी, पार्षद राकेश बिष्ट, जगदीश मेहरा, विवेक शाह, सुखपाल शाह, राजाराम अणथ्वाल, विजय ध्यानी, मोहन सिंह आदि ने कहा कि नगर निगम बनने के बाद नहरों और गूलों की मरम्मत करवाना मुश्किल हो गया है।
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