दुर्गापुरी में चल रहे भागवत कथा में राधा-कृष्ण की झांकी।
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ईश्वर सभी धर्मों से विद्यमान है। जिससे इस लोक में अभ्युदय और परलोक मोक्ष प्राप्ति होती है। अंतर्मन से धारण किया जाने वाले आचरण को ही धर्म कहते हैं।
भाबर क्षेत्र के हल्दी हाथ वेडिंग प्वाइंट, दुर्गापुरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममर्गाइं ने यह बात कही। उन्होंने कहा है कि सभी प्राणी सुख की इच्छा रखते हैं और वह सुख धर्म से होता है। सभी वर्णों को सदैव प्रयत्न पूर्वक धर्म का आचरण करना चाहिए। कहा कि पाश्चात्य सभ्यता के दुष्परिणामों से बचने के लिए धार्मिक आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय सुसंस्कृति की पहचान कराई जा सकती है। जब तक सत्संग के माध्यम से नाम संकीर्तन कथा का महत्व नहीं समझा जाएगा, तब तक संकीर्तन में नाम जाप में मन कैसे लगेगा। वर्तमान में कथा का महत्व लोग नाचना गाना समझने लगे हैं और हर कथा में यही देखने को मिलता है। इस मौके पर वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, भक्ति बड़थ्वाल, शक्ति बड़थ्वाल, विश्वेश्वरा नंद बड़थ्वाल, विश्वजीत बड़थ्वाल, जगमोहन पपनाई, भाष्कर बड़थ्वाल, हर्षवर्द्धन बिंजोला, विक्रम सिंह रावत, सुभाष कोठारी, आचार्य बृजेश, उमाशंकर, सुरेंद्र, हितेश, द्वारिका नौटियाल आदि मौजूद रहे।