मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजू श्रीवास्तव ने पौड़ी ब्लाक में विभिन्न योजनाओं में 12 लाख 44 हजार रुपयों के गबन के मामले में खंड विकास अधिकारी और कनिष्ठ लेखा लिपिक को दोषी पाते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी ठोका।
पौड़ी ब्लाक में वर्ष 2010 में दैवी आपदा, हरियाली समेत विभिन्न विकास योजनाओं में 12,44,721.00 रुपयों के गबन का मामला प्रकाश में आने पर तत्कालीन खंड विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह को ब्लाक से हटाकर विकास भवन में संबद्ध किया गया था। नैनीडांडा के खंड विकास अधिकारी वेद प्रकाश को पौड़ी ब्लाक का खंड विकास अधिकारी बनाया गया था। बाद में इस मामले की जांच की गई थी। मार्च 2010 में सीडीओ के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी वेद प्रकाश ने पौड़ी थाने में तत्कालीन खंड विकास विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह और कनिष्ठ लेखा लिपिक लोकेेश कुमार के खिलाफ गबन के मामले में तहरीर दी थी। बीडीओ की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी बीडीओ वीरेंद्र सिंह और कनिष्ठ लेखा लिपिक के खिलाफ धारा 409 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रही सहायक अभियोजन अधिकारी श्रद्धा रावत ने बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गबन के आरोपी बीडीओ वीरेंद्र सिंह और कनिष्ठ लेखा लिपिक लोकेश कुमार को आईपीसी की धारा 409 और 120 बी में दोषी पाया। न्यायालय ने दोनों को प्रत्येक धारा में पांच-पांच साल की सजा और दस-दस हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया। न्यायालय के फैसले के अनुसार अर्थ दंड जमा न करने पर दोनों को दो महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।