गढ़वाल विवि में फर्जी बिल घोटाले के आरोपियों के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। पुलिस का दावा है कि घोटाले से संबंधित कई अहम सबूत जुटाए गए हैं। उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कई आरोपी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
गढ़वाल विवि में वर्ष 2007-08 में वाहन सेवा का टेंडर बीएस नेगी टूर एंड ट्रैवल कंपनी को दिया गया था। विवि ने कंपनी की सेवाओं के लिए उसे 3.50 लाख का भुगतान किया। वर्ष 2010-11 में सोसायटी फार रेगूलेशन अंगेस्ट करप्शन संस्था के महासचिव संतोष ममगाईं ने सूचना के अधिकार के तहत वाहन सेवा के भुगतान की सूचना मांगी। ममगाईं ने विवि की ओर से किए गए बिलों के भुगतान का सत्यापन आरटीओ पौड़ी, हरिद्वार व देहरादून से करवाया। जांच करने पर पता चला कि दोपहिया व तिपहिया वाहनों के फर्जी बिलों से भुगतान किया गया है।
सोसायटी की ओर से पुलिस को तहरीर देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर सोसायटी ने कोर्ट में अपील की। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने सात जून 2014 को मुकदमा दर्ज किया। इसी वर्ष तीन फरवरी को मुख्य आरोपी एजेंसी संचालक बीएस नेगी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। मुख्य आरोपी अभी जमानत पर बरी है। विवेचना अधिकारी एसआई रविंद्र शाह ने बताया कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जांच के दौरान कई अहम सबूत जुटाए गए हैं। जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पुलिस ने आरोपियों की संख्या में बारे मे खुलासा नहीं किया है।