रिखणीखाल विकास खंड के मेलधार ग्राम पंचायत में 2005-06 में बनी लघु सिंचाई विभाग की सिंचाई योजना विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते ठप पड़ी है। सिंचाई योजना का लाभ न मिलने से गांव में खेती बंजर पड़ गई है।
हाल यह है कि योजना के तहत बने हौज, पाइप लाइनें और गूल बदहाल पड़ी हैं। हाल में यहां लगे पाइपलाइन भी लोग निकालकर ले गए हैं। ग्रामीणों की ओर से योजना की मरम्मत कर इसे पुन: चालू किए जाने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
ग्रामीण क्षेत्र में विभागीय अधिकारियों की उदासीनता सरकारी योजनाओं और ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। मेलधार ग्राम पंचायत के सिद्धपुर लमधार तोक में वर्ष 2005-06 में बनी लघु सिंचाई विभाग की योजना इसका एक उदाहरण है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के प्रारंभ में ग्रामीणों को अच्छा लाभ मिला।
लोगों ने सिंचाई योजना का लाभ उठाते हुए अच्छी खेती की। वर्ष 2010 में आपदा के चलते योजना को क्षति हुई तो विभाग ने इसकी मरम्मत कराकर योजना को किसी तरह शुरू कराया। वर्ष 2014 में अतिवृष्टि की चपेट में आने से योजना ठप पड़ी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने योजना की सुध तक नहीं ली। योजना से लाभान्वित करीब तीस बीघा क्षेत्र बंजर होने के कगार पर है।
पूर्व प्रधान मोहन लाल मैंदोला ने बताया कि योजना के तहत लमधार में हौज, पाइपलाइन और गूल का निर्माण किया गया था, लेकिन कुछ दिन पूर्व कुछ लोग इसके पाइप भी उखाड़कर ले जा चुके हैं। ग्राम प्रधान आशा देवी की ओर से मामले की तहरीर रिखणीखाल थाने में की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण यतेंद्र देवरानी ने विभाग से योजना को फिर से शुरू कराने की मांग की है।
लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नत्थू सिंह का कहना कि उक्त योजना की जानकारी उन्हें नहीं है। इस बीच ग्रामीणों ने भी योजना के बारे में नहीं बताया। ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मिलेगा तो योजना को प्रधानमंत्री कृषि योजना के तहत रख लिया जाएगा।