आंचल डेरी (गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ) में कर्मचारियों की हड़ताल से प्रभावित हो रहे व्यवसाय को पटरी पर लाने के लिए डेरी विकास संघ ने प्रभावी कदम उठाए हैं। आंदोलन की अवधि के लिए संघ के कार्य सेवित क्षेत्र को दो सेक्टरों में विभाजित किया गया है। कोटद्वार से एकत्रित होने वाले दूध की बिक्री हरिद्वार दुग्ध संघ के माध्यम से पौड़ी जिले में होगी। इसकी जिम्मेदारी सहायक निदेशक डेरी विकास विभाग पौड़ी की होगी।
वेतन भुगतान समेत अन्य मांगों के लिए आंचल डेरी के कर्मचारी बार-बार आंदोलन कर रहे हैं। इससे दुग्ध उपार्जन, विपणन और उत्पादन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे पहले से घाटे में चल रही डेरी का घाटा बढ़ता जा रहा है। व्यवस्था सुधारने के लिए डेरी के प्रधान प्रबंधक जीएस मौर्य ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा था। निदेशक ललित मोहन रयाल ने नौ बिंदुओं पर आधारित आदेश जारी किया है। इसके अनुसार हड़ताली कर्मचारियों को प्रधान प्रबंधक नो वर्क नो पे का नोटिस जारी करेंगे। जबकि संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।
लैंसडौन तक दूध की आपूर्ति की जिम्मेदारी कोटद्वार क्षेत्र प्रभारी सहायक निदेशक को दी गई है। जबकि श्रीनगर से जोशीमठ की जिम्मेदारी प्रधान प्रबंधक की होगी। श्रीनगर क्षेत्र में एकत्रित होने वाले दूध को ठंडा कर लूज मिल्क मशीन के माध्यम से निकटवर्ती क्षेत्रों में बेचा जाएगा। इसके अलावा अर्द्धकुंभ मेला हरिद्वार के लिए उपलब्ध कराए गए तीन कर्मचारियों को स्थिति सामान्य होने तक पौड़ी जिले से संबद्ध कर दिया गया है।