राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर के ईएनटी (कान-नाक-गला) रोग विभाग के चिकित्सकों की टीम ने एक मरीज के गले से लगभग 250 ग्राम का गलगंड (ग्वाइटर) निकालने में सफलता हासिल की है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्यतया गलगंड का आकार 25 ग्राम का होता है। लेकिन उक्त मरीज में इसका आकार और वजन काफी अधिक था।
श्रीकोट निवासी एक महिला पिछले कई सालों से गलगंड की समस्या झेल रही थी। मेडिकल कालेज के ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. रविंद्र बिष्ट परीक्षण करने पर उसे गलगंड निकालने की सलाह दी। डा. बिष्ट ने बताया कि गलगंड न निकालने पर ट्यूमर होने की आशंका रहती है। महिला में गलगंड का आकार भी काफी बड़ा दिखाई दे रहा था।
शुक्रवार को डा. बिष्ट और उनके सहयोगी सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक (एसआर) अमित व रीचा मीणा की टीम ने महिला का आपरेशन किया। लगभग 4 घंटे तक चले आपरेशन के बाद चिकित्सकों ने गलगंड निकाल लिया। गलगंड का आकार और वजन देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। लगभग 9 सेंटीमीटर लंबे और 6 सेंटीमीटर चौड़े गलगंड का आकार लगभग 250 ग्राम निकला।
क्या है गलगंड
मनुष्य के गले में थॉयरायड ग्लेंड होती है। थॉयरायड आयोडीन का प्रयोग करती है। थायरायड ग्लेंड से हार्मोन्स का स्राव करती है। जब शरीर में हार्मोन का स्राव कम या ज्यादा हो जाता है, तो कई प्रकार की बीमारियां होती है। ग्वाइटर, गलगंड, घेंघा रोग या गंडमाला भी इसी वजह से होता है।