दुगड्डा विकासखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) लागू करने का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई है। जनप्रतिनिधियों की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
मंगलवार को क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों और संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया, जिसमें कहा गया कि राज्य गठन के 19 वर्षों के बाद भी पहाड़ों की रहनुमाई का दम भरने वाले दोनों राष्ट्रीय दलों ने गांवों की मूलभूत समस्याओं को हाशिये पर रखकर उत्तराखंडवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। वन अधिनियम के काले कानूनों ने समूचे उत्तराखंड को बंधक बना दिया है। सड़क, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार आदि मूलभूत समस्याओं के चलते बदस्तूर पलायन जारी है। जंगली जानवरों के आतंक से लोग खेती तक नहीं कर पा रहे हैं। डीडीए में शामिल किए गए घाड़ क्षेत्र में आज भी लोग सड़क सुविधा के अभाव में मरीजों को कंधे पर लादकर मीलों दूर चिकित्सालयों तक पहुंचाने को विवश है। ज्ञापन देने वालों में जिला पंचायत सदस्य भरत सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह नेगी, रोशन सिंह, जितेंद्र सिंह, जयमल सिंह, शिब्बू प्रसाद, दीपक सिंह आदि शामिल हैं।