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Kotdwar News: 16 घंटे बाद पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों ने सुनाई खरी-खोटी

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कोटद्वार। जमूण गांव में बाघ के हमले की घटना के 16 घंटे बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। जिससे ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। ग्रामीणों ने अधिकारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने वन विभाग से दुर्गा देवी गेट से उनके पुश्तैनी रास्ते को आवाजाही के लिए खोलने की मांग की।

जमूण गांव में बाघ के हमले में मृत गुड्डी देवी के चाचा ससुर अरुण भदोला ने बताया कि वह वन विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार उनके पुश्तैनी रास्ते को आवाजाही के लिए खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सड़क के अभाव में उन्हें जंगल के रास्ते करीब तीन किमी पैदल आवाजाही को मजबूर होना पड़ रहा है। कहा कि वन विभाग ने उनके सभी हक हुकूक छीन लिए हैं। गांव में बिजली तक नहीं है। स्थिति यह है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव से लगातार पलायन हो रहा है। जहां पूर्व में गांव में 30-35 परिवार रहते थे। वहीं अब दो ही परिवार रह रहे हैं। उन्होंने रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ राहुल मिश्रा से दुर्गा देवी गेट से उनके पुश्तैनी रास्ते को आवाजाही के लिए खोलने की मांग की।
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महिला की मौत से पूरा परिवार सदमे में



नैनीडांडा ब्लॉक के जमूण गांव में बाघ के हमले में मृत गुड्डी देवी परिवार में अकेली महिला थी। उसके जाने से पूरा परिवार सदमे में है। मृतका का पति राजू भदोला गांव में ही एक होटल में काम करता है। उसका बड़ा पुत्र जयदीप वन विभाग में दैनिक संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत है। छोटे पुत्र कुलदीप की शंकरपुर हल्दूखाल में फोटोग्राफी की दुकान है।

कुत्ता न होता तो शव को खा गया होता बाघ



अगर कुत्ता नहीं होता तो बाघ मृतका गुड्डी देवी के शव को खा गया होता। हमले के बाद बाघ जब मृतका को घसीटते हुए 200 मीटर दूर झाड़ियों में ले गया, तो कुत्ता भी पीछा करते हुए झाड़ियों में पहुंच गया। कुत्ते ने बाघ को गुड्डी का शव नहीं खाने दिया। जिस पर बाघ शव को छोड़कर वहां से भाग गया।
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क्षेत्र में यह पहली घटना, ग्रामीणों में दहशत

जमूण गांव निवासी अरुण भदोला ने बताया कि उनके गांव और आसपास के क्षेत्र में बाघ के हमले की यह पहली घटना है। इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने अपने बुजुर्गों व परिजनों से इस तरह की घटना कभी सुनी तक नहीं। ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि घटना के बाद से जमूण, बखरोटी घिरौली, बसेड़ी, छीम पाणी, गौला, कमेड़ा, कालाखांद समेत आसपास के गांवों में दहशत बनी हुई है।
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