कण्वाश्रम विकास समिति और डू समथिंग सोसाइटी समेत कई संगठनों की मांग पर प्रदेश सरकार ने कलालघाटी का नाम बदलकर कण्वघाटी कर दिया है। शासन की ओर से इस आशय का शासनादेश जारी कर दिया गया है। कलालघाटी का नाम कण्वघाटी करने पर विभिन्न संगठनों ने खुशी जताई है।
शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली की ओर से 16 दिसंबर, 2020 को जारी आदेश में यह जानकारी दी गई है। शासनादेश में कहा गया है कि पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार क्षेत्र के कलालघाटी का नाम परिवर्तित करते हुए कण्वघाटी किया जाता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। शहरी विकास सचिव के अनुसार उक्त नाम परिवर्तन उत्तर प्रदेश पुनर्गठन 2000 की धारा 6 के तहत कलालघाटी से कण्वघाटी किया गया है।
कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष ले. कमांडर बीएस रावत (से.नि.) और महासचिव आभा डबराल, डू समथिंग सोसाइटी के अध्यक्ष मयंक कोठारी भारतीय और संरक्षक प्रकाश चंद्र कोठारी ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। कहा कि महर्षि कण्व की तपस्थली कण्वाश्रम के द्वार कलालघाटी को अब कण्वघाटी के नाम से जाना जाएगा। उनका कहना है कि कलालघाटी नाम से क्षेत्र में कोई राजस्व ग्राम भी नहीं है। जिस स्थान को कलालघाटी बाजार के नाम से जाना जाता है, वह दूसरे राजस्व ग्रामों में पड़ता है। कण्वघाटी नाम मिलने से क्षेत्र की पहचान कण्वाश्रम से जुड़ेगी। मयंक कोठारी भारतीय ने बताया कि इससे पूर्व नगर निगम के माध्यम से कोटद्वार के नाम के आगे कण्वनगरी जोड़ने पर सरकार अपनी सहमति दे चुकी है।
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नगर निगम कर चुका अस्वीकार
कोटद्वार। नगर निगम की 25 फरवरी, 2020 की बोर्ड बैठक में कलालघाटी के नाम परिवर्तन को सर्वसम्मति से अस्वीकार कर चुका है। दरअसल, कोटद्वार आगमन के दौरान संगठनों की मांग पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कलालघाटी का नाम परिवर्तन कर कण्वघाटी करने की घोषणा की थी। इसके बाद शहरी विकास विभाग की ओर से 23 जनवरी को उक्त नाम परिवर्तन करने का पत्र नगर निगम को भेजा था। बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव संख्या पांच के तहत रखा गया, जिस पर चर्चा भी हुई, लेकिन सदन ने सर्वसम्मति से कलालघाटी के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शासन ने बोर्ड बैठक की अस्वीकार्यता को नजरअंदाज करते हुए तीन दिन पहले बाकायदा जीओ निकालकर नाम परिवर्तन कर डाला।