शिक्षा विभाग आदर्श विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे तो कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसका उदाहरण है आदर्श राजकीय इंटर कालेज बीरोंखाल। इस विद्यालय को विभाग ने आदर्श नाम तो दे दिया, लेकिन आदर्श जैसा कुछ नहीं किया। आलम यह है कि विगत एक वर्ष से साइंस के चार विषयों पर शिक्षक नहीं हैं। बच्चे खुद किताबों से पढ़कर काम चला रहे हैं। विद्यालय प्रशासन और शिक्षक अभिभावक संघ लगातार विभाग के आला अधिकारियों से शिक्षकों की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग शिक्षकों की तैनाती न कर विद्यालय में शिक्षा ले रहे 94 बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2015-16 में राजकीय इंटर कालेज बीरोंखाल को आदर्श विद्यालय का दर्जा दे दिया गया था, लेकिन विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की तैनाती करना विभाग भूल गया। वर्तमान में हालत यह है कि बच्चों की छमाही परीक्षा बीत चुकी है, लेकिन गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान का एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इस वजह से अधिकतर बच्चे विज्ञान में फेल हैं। इस हालत में वार्षिक परीक्षा में बच्चों का परीक्षा परिणाम क्या होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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15 दिन के अंदर शिक्षक की तैनाती नहीं हुई तो होगा आंदोलन
शिक्षक अभिभावक संघ के अध्यक्ष दीपक कुंवर ने शिक्षा विभाग पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि एक वर्ष से शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से बच्चे विज्ञान विषय की पढ़ाई नहीं ले पा रहे हैं। छमाही पेपर हो गए हैं, लेकिन अभी तक किसी शिक्षकों का अता-पता नहीं है। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा सिर पर हैं, ऐसे में शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई तो बच्चों का पूरा वर्ष खराब हो सकता है। उन्होंने 15 दिन के अंदर शिक्षकों की तैनाती नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि विगत एक वर्ष से आदर्श जीआईसी बीरोखाल में विज्ञान के शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पाई है। लगातार विभाग को शिक्षकों की डिमांड भेजी जाती है, लेकिन कोई शिक्षक विद्यालय में आने को तैयार नहीं है। इस वर्ष छमाही में विज्ञान विषय में बच्चों का रिजल्ट ठीक नहीं रहा। आला अधिकारियों को एक बार फिर रिमाइंडर भेजा जाएगा।
- बृजलाल सागर, खंड शिक्षा अधिकारी बीरोंखाल