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संपत्ति कर के मुद्दे को लेकर बचाव में आए मेयर और पूर्व मंत्री

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संपत्ति कर लागू करने के मामले में नगर निगम में पारित प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद मेयर हेमलता नेगी और पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी बचाव अपने बचाव में आ गए। मंगलवार को लोनिवि के गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि संपत्ति कर को लेकर 12 सितंबर, 2016 में ही तत्कालीन नगर पालिका क्षेत्र में संपत्ति कर बढ़ाने का आदेश आ चुका था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे लागू नहीं होने दिया। 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने जनता की भावनाओं के विरुद्ध नगर निगम थोप दिया। इसके बाद सुनियोजित ढंग से संपत्ति कर को लेकर नगर निगम को पत्र जारी कर दिए। कहा कि मुख्यमंत्री ने तब शहरी विकास सचिव से बात कर 10 साल तक कोई टैक्स न वसूलने के निर्देश दिए थे। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नगर निगम में 25 फरवरी को हुई बोर्ड के बाद अभी तक बोर्ड की बैठक नहीं हुई है। बोर्ड में पारित प्रस्ताव की पुष्टि नहीं होने के कारण अभी उक्त प्रस्ताव कोई मायने नहीं रखता। लउन्होंने कहा कि उक्त प्रस्ताव सरकार के निर्देश पर ही बोर्ड बैठक में रखा गया था। नोटिफिकेशन जारी होने के कारण बोर्ड के प्रस्ताव की अहमियत नहीं रह गई है। कहा कि भाजपा पार्षद तथ्यहीन और आधारहीन बातों पर चर्चा कर रहे हैं। इस मौके पर जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन खर्कवाल, महानगर अध्यक्ष संजय मित्तल, पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय नारायण सिंह, पार्षद विपिन डोबरियाल, बीना नेगी, अंजुम शबा, हरीश नेगी, अनिल रावत आदि मौजूद रहे।
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