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आस्था पर भारी पड़ी बर्फबारी, कालिंका के दरबार तक नहीं पहुंच पाए हजारों श्रद्धालु

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गढ़-कुमाऊं की सीमा पर 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां कालिंका सिद्धपीठ में हुए हिमपात का नजारा। - फोटो : KOTDWAR
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गढ़वाल और कुमाऊं की सीमा पर स्थित कालिंका मंदिर शक्तिपीठ में शनिवार को आयोजित जतौड़ा मेले में भारी बर्फबारी के कारण कई श्रद्धालु नहीं पहुंच पाए।
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हर तीन साल में एक बार होने वाले कालिंका के जतौड़ा मेले पर दो दिन से हो रही बर्फबारी भारी पड़ गई। करीब 2200 मीटर की ऊंचाई पर गढ़-कुमाऊं की सीमा पर स्थित इस कालिंका मंदिर में गढ़वाल व कुमांऊ में बसे 14 गांव के बडियारी लोगों की गहरी आस्था है। शनिवार को आयोजित मेले में सैकड़ों लोगों ने विषम हालात के बावजूद प्रतिभाग किया और पूजा अर्चना की। मंदिर समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बडियारी ने बताया कि इस बार मंदिर समिति व ट्रस्ट ने मेले को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी की थी, लेकिन खराब मौसम व भारी बर्फबारी ने सबपर पानी फेर दिया। बताया कि अगला मेला अब तीन साल बाद आयोजित होगा।
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1991 में हुई भयंकर बर्फबारी में 21 श्रद्धालुओं को गंवानी पड़ी थी जान
सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र बडियारी बताते हैं कि मां कांलिका सिद्धपीठ बडियारी लोगों के 14 गांवों की आराध्य देवी हैं। इन गांवों के लोग देश-विदेश में जहां भी रहते हों, वे सपरिवार जतौड़ा मेले में जरूर पहुंचते हैं। कालिंका सिद्धपीठ में पहुंचने के लिए बीरोंखाल, धुमाकोट समेत कई स्थानों से मार्ग हैं, लेकिन सिद्धपीठ मंदिर तक पहुंचने के लिए चार से पांच किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इस बार की बर्फबारी को देखकर श्रद्धालुुओं के जहन में वर्ष 1991 की घटना ताजा हो गई, जब कालिंका मेले के ही दिन भयंकर बर्फबारी के चलते 21 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इस बार भी मंदिर तक पंहुचने वाले सभी रास्तों जोगीमढ़ी, सराइखेत, बीरोंखाल, कोठा आदि रास्ते तीन से चार फुट तक बर्फ से ढके गए थे। मंदिर तक पहुंचने वाली सभी सड़के बर्फबारी से पट गए थे।
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