श्रीनगर। गढ़वाल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेरी) से निष्प्रयोज्य मशीन/उपकरणों को अन्यत्र शिफ्ट किया जाना कर्मचारियों को रास नहीं आ रहा है। मौजूदा समय में डेरी में पैकेजिंग बंद होने और संग्रहण कम होने के चलते उत्तराखंड सहकारी डेरी फेडरेशन लि. (यूसीडीएफ) यहां से कुछ मशीन अन्यत्र ले जा रहा था, लेकिन कर्मचारियों के रुख को देखते हुए यूसीडीसीएफ ने कार्रवाई स्थगित कर दी है। साथ ही संघ को सयंत्रों का प्रयोग करते हुए उपयोगिता साबित करने के लिए कहा है।
आंचल डेरी श्रीनगर की स्थिति सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थिति यह है कि आमदनी से कई गुना अधिक डेरी के खर्चे आ रहे हैं। इस वजह से कर्मचारियों की वेतन भी नहीं निकल पा रही है। श्रीनगर व पौड़ी क्षेत्र से दूध का संग्रहण कम होने के कारण पैकेजिंग में ज्यादा खर्च आ रहा था, जिससे वर्ष 2016 से शहर में पैकेट के बजाय खुला दूध बेचा जा रहा है। वहीं कोटद्वार और कालागढ़ क्षेत्र से डेरी में दूध लाने के बजाय कोटद्वार चिलिंग सेंटर से ही सप्लाई की जा रही है, ताकि ढुलान का खर्चा बचे।
डेरी में उत्पादन व संग्रहण कम होने और पैकेजिंग नहीं होने के कारण कई मशीन बंद पड़ी हुई हैं। खास बात यह है कि दुग्ध संघों को सरकार की ओर से मशीन उपलब्ध कराई गई थी। इनका उपयोग नहीं होने पर यूसीडीएफ ने इन मशीनों को ऐसी डेरी में भेजने का निर्णय लिया था, जहां उनका उपयोग हो सके। लेकिन कर्मचारियों ने इस पर एतराज जताया है। दुग्ध उत्पादक संघ कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि साजिशन डेरी से मशीनों को हटाया जा रहा है। यूसीडीएफ के प्रबंध निदेशक ललित मोहन रयाल का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने का सुझाव अच्छा है। मशीन उपयोग में रहे। जहां है, वहीं संचालित होते रहे। ताकि शासकीय धन का सदुपयोग हो सके। यदि ऐसा होता है, तो डेरी को लाभ होगा।