कोटद्वार। मां भगवती भुवनेश्वरी 10 महाविद्याओं में चतुर्थ महाविद्या हैं, जिन्हें ब्रह्मांड की स्वामिनी (राज राजेश्वरी) और पालन-पोषण करने वाली दिव्य मां माना जाता है। उन्हें भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिक निधियों का अधिष्ठाता माना जाता है। उनकी साधना से साधक जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होता है और परम सत्य को प्राप्त करता है। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत प्राचीन सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर गूलरझाला में जारी श्रीमद्देवी भागवत कथा के चौथे दिन की कथा में कथा व्यास आचार्य विपिन सेमवाल ने यह बात कही। मुख्य अतिथि विमल प्रसाद शुक्ला, उद्योगपति सुरेश ठाकुर, गीता नेगी, मंदिर समिति के अध्यक्ष गौरव कुकरेती, राजू नेगी, देव डोली उपासक दीपक नेगी, राहुल भंडारी आदि उपस्थित रहे। संवाद