रिखणीखाल ब्लाक का एक विद्यालय ऐसा भी है जहां पढ़ाई तब शुरू होती है जब बच्चे पानी से भीगे बैंच और टेबल को साफ करते हैं। टपकती छत के नीचे ऐसी जगह तलाशते हैं जहां पानी न टपक रहा हो। भवन कभी भी धराशायी हो सकता है। यह हाल है राजकीय इंटर कालेज द्वारी का। यहां करीब 400 छात्र खतरे की जद में भविष्य के सपने बुन रहे हैं।
रिखणीखाल ब्लाक का यह विद्यालय क्षेत्र के प्रमुख विद्यालयों में से एक है। यहां करीब 10 ग्राम पंचायतों के बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। एक ओर जहां शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या पर चिंता जता रहा है, वहीं करीब चार सौ की छात्र संख्या होने के बाद भी विद्यालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिला पंचायत सदस्य मीना देवी ने बताया कि करीब 30 वर्ष पूर्व स्थानीय लोगों की मांग पर सरकार ने क्षेत्र में इंटर कालेज की स्थापना की थी, इसके बाद एकआध बार कमरों की मरम्मत की गई, लेकिन वह भी गुणवत्ता की कमी की भेंट चढ़ गए। आज विद्यालय भवन अति जर्जर हालत में है, सभी कमरों की छत टपक रही है।
समाजसेवी धीरज कुमार ने शिक्षा विभाग पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि कई बार विभाग के अधिकारियों को भवन मरम्मत के लिए लिखित और मौखिक रूप से मांग की गई। लेकिन, विद्यालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसा ही हाल रहा तो क्षेत्रीय जनता आंदोलन को बाध्य होगी।
उधर, बीईओ रिखणीखाल रामफल पाल ने बताया कि राजकीय इंटर कालेज द्वारी के भवन निर्माण का प्रस्ताव आला अधिकारियों को को भेजा गया है। बजट मिलते ही इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।