भाबर की हल्दूखाता पट्टी क्षेत्र के गांवों में अस्सी के दशक में बिछी पेयजल लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। पेयजल लाइनें लोगों को पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा पा रही है। जगह-जगह लीकेज से पीने का पानी बर्बाद हो रहा है।
मगनपुर निवासी जेपी बहुखंडी व मधुसूदन नेगी समेत कई ग्रामीणों ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को पत्र के माध्यम से पेयजल लाइनों की लीकेज से बड़ी मात्रा में पीने के पानी के बर्बाद होने की शिकायत की है। किशनपुर-ढोका मार्ग पर डिग्री कॉलेज व शिवमंदिर के पास पीने का पानी बर्बाद होने से लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। कलालघाटी और हल्दूखाता क्षेत्र में भी लोग पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। समाज सेवी जगदंबा प्रसाद उनियाल का कहना है कि जलसंस्थान काम चलाऊ व्यवस्था पर पेयजल आपूर्ति कर रहा है। जर्जर लाइनों की लीकेज बड़ी समस्या बनी हुई है। रामदयालपुर निवासी दाताराम केष्टवाल का कहना है कि आए दिन नलकूपों की मोटर फुंक रही हैं, मरम्मत में भी संबंधित विभाग एक सप्ताह लगा दे रहा है। भीषण गर्मी में पेयजल किल्लत परेशानी का सबब बनी हुई है।
जर्जर और पुरानी हो चुकी लाइनों को बदलने के लिए आगणन बनाकर शासन को भेजे गए हैं। पेयजल लाइनों की लीकेज को तत्काल बंद करने के निर्देश अधीनस्थ कर्मियों को दिए जा रहे हैं।
-संतोष कुमार उपाध्याय, ईई जल संस्थान कोटद्वार।