लैंसडौन। एक और नए साल ने दस्तक दे दी। साल के पहले ही दिन लैंसडौन के कारोबारियों की उन उम्मीदों पर पानी फिर गया, जिसमें उन्होंने नववर्ष पर लैंसडौन के पर्यटकों से गुलजार होने का अनुमान लगाते हुए तैयारियां की थीं।
साल 2025 के स्वागत के लिए होटल एवं रेस्टोरेंट कारोबारियों ने डीजे, बोन फायर की व्यवस्था के अलावा बिजली की झालरों से प्रतिष्ठान सजाए हैं। कुछ होटलों में परंपरागत ढंग से उत्तराखंडी अंदाज में आगंतुकों का स्वागत करने का इंतजाम किया गया था। अन्य वर्षों की तुलना में बाजार में पर्यटकों की संख्या काफी कम नजर आई।
होटल स्वामियों के अनुसार 30 दिसंबर तक लैंसडौन व आसपास के होटलों के कमरों की 40 प्रतिशत ही बुकिंग हो सकी थी। बताया जा रहा है कि वीकेंड नहीं होने और मंगलवार होने के कारण लैंसडौन का खुशनुमा, स्वस्थ, सुंदर और शांत वातावरण भी पर्यटकों को अपनी ओर नहीं खींच सका। भुल्ला ताल, दरबान सिंह संग्रहालय, टिप इन टॉप, कालेश्वर मंदिर, भीम पकोड़ा, शताब्दी द्वार आदि क्षेत्रों में अपेक्षित रौनक नहीं रही।
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नए साल के जश्न पर पड़ा मंगल का साया
पर्यटन कारोबारी विकास सिंह, लता खंडेलवाल, कुलदीप कुमार ने बताया कि 31 दिसंबर को मंगलवार होने के कारण ज्यादातर पर्यटक मांस और मदिरा का सेवन नहीं करने और मौज-मस्ती नहीं कर पाने के कारण नहीं पहुंचे। जिसका असर लैंसडौन समेत आसपास के स्टेशनों के होटलों की बुकिंग और आयोजनों पर पड़ा।
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पर्यटकों के व्यंजन और मनोरंजन के माकूल इंतजाम किए गए थे। इस बार थर्टी फर्स्ट नाइट को मंगलवार और वीकेंड नहीं होने का असर दिखाई दिया। -संजीव नैनवाल, होटल कारोबारी (फोटो)
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कुछ बड़े होटल-रिजॉर्ट तो पैक हो गए थे, लेकिन नए साल पर उम्मीद के अनुरूप अन्य होटल पूरी तरह गुलजार नहीं हो सके। -अजय सतीजा, अध्यक्ष लैंसडौन होटल एसोसिएशन (फोटो)