कोटद्वार। नगर निगम के दूसरे मेयर के सामने भी चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। कोटद्वार में अधूरा पड़ा मोटर नगर बस अड्डा, ट्रंचिंग ग्राउंड, आपदा से जूझता समूचा क्षेत्र, नगर पालिका के ढांचे पर चल रहे नगर निगम के भवन का विस्तार, पार्किंग सुविधाओं का अभाव, अतिक्रमण समेत कई मुद्दे नवनिर्वाचित मेयर के सामने चुनौती पेश करेंगे।दिसंबर, 2017 को अस्तित्व में आए कोटद्वार नगर निगम के मेयर और 40 पार्षदों के चुनाव के लिए 23 जनवरी को मतदान हुआ। इससे पहले वर्ष 2018 में हुए नगर निगम के पहले चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की धर्मपत्नी हेमलता नेगी के सिर पहली मेयर का ताज सजा था।
बीते पांच सालों में कांग्रेस की मेयर हेमलता नेगी का भाजपा सरकार से टकराव जग जाहिर है, जिससे ज्यादातर समस्याओं का समाधान नहीं हो सका था। अब दूसरे मेयर के सामने भी वही समस्याएं मुंह बांए खड़ी हैं। मोटर नगर में प्रस्तावित अत्याधुनिक बस अड्डे का निर्माण ठप पड़ा हुआ है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
बस अड्डा न होने से नगर में यातायात व्यवस्था और पार्किंग चुनौती बना हुआ है। नगर पालिका के कार्यकाल में खोह नदी के किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड बनाया गया था, लेकिन ट्रंचिंग ग्राउंड की जगह बहुत कम होने के कारण ट्रंचिंग ग्राउंड में नगर पालिका का कूड़ा निस्तारण ही नहीं हो पाता था। नगर निगम बनने के बाद भाबर और सनेह की 35 ग्रामसभाओं के 73 गांवों के कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था भी उनके समक्ष चुनौती पेश करेगा।
कोटद्वार नगर निगम चारों और से वन क्षेत्र होने के साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी नेशनल पार्क और बिजनौर वन प्रभाग के बीच में बसा है। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी समस्या बनी हुई है। शहर में हर जगह अतिक्रमण के कारण होने वाली असुविधा और जाम की समस्या से निजात दिलाना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।