मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि कोटद्वार एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यहां एक ओर जहां श्रीसिद्धबली बाबा का धाम है, वहीं राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम भी है। वह अगले वर्ष फरवरी में कण्वाश्रम में आयोजित होने वाले वसंत पंचमी के मेले में आएंगे। कण्वाश्रम भारत देश की पहचान बनेगा। उन्होंने इस बार कण्वाश्रम में वसंत पंचमी को मनाए जाने वाले कण्वाश्रम महोत्सव को भरत महोत्सव के रूप में मनाने की बात कही।
मुख्यमंत्री शनिवार को यहां श्रीसिद्धबली बाबा के धाम में मत्था टेकने पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी समेत कई दायित्वधारी मौजूद थे। इसके बाद मुख्यमंत्री महोत्सव में चल रही गढ़वाली भक्ति संगीत के पंडाल में पहुंच गए। लोगों का अभिवादन करने के बाद वह जनता के बीच पहुंचे। मंदिर के महंत दिलीप रावत ने मुख्यमंत्री को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मेला अध्यक्ष सुमन कोटनाला, संयोजक उद्योगपति अनिल कंसल, मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी ने भी उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि कुर्सी मिलने से अक्सर लोगों की मति खराब हो जाती है। उन्होंने लोगों से सिद्धबाबा से उनके लिए सुमति दिए जाने की कामना करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कण्वाश्रम को उसकी पहचान दिलाने के लिए कृत संकल्प है। कण्वाश्रम में हर साल होने वाले महोत्सव को भरत महोत्सव के नाम से मनाया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि सरकार कण्वाश्रम में पर्यटन विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है। झील निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस मौके पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा, राज्य विधि अध्ययन समिति के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक बडोला समेत कई कांग्रेसी शामिल थे।