तीन साल पहले आपदा से ध्वस्त हुए चौरास स्पोर्ट्स स्टेडियम मेें भूस्खलन जारी है। इन दिनों हो रही बारिश से हुए भूस्खलन से गढ़वाल विवि के चौरास परिसर को श्रीनगर-चौरास पैदल पुल से जोड़ने वाली सड़क भी खतरे की जद में आ गई है। जल्द सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए बजट आंवटित नहीं होने पर स्टेडियम का बचा हुआ भाग और विवि की अन्य जमीन के साथ ही चौरास का संपर्क पैदल मार्ग भी ध्वस्त हो जाएगा।
जून 2013 में आए जलप्रलय से चौरास स्टेडियम का आधा हिस्सा, पेयजल लाइन और संपर्क मार्ग नदी में समा गया था। भू-कटाव रोकने और सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए विवि ने यूजीसी को 60 करोड़ रुपये का आगणन भेजा था।
सीपीडब्लूडी ने प्रथम चरण में करीब पौने 29 करोड़ की लागत से नदी के प्रवाह को मोडने और लगभग 11 मीटर ऊंची दीवार का निर्माण किया है। विवि को निर्माण के लिए अब तक सिर्फ 20 करोड़ ही मिले हैं। धनाभाव के कारण सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य का प्रथम चरण ही पूरा हो पाया है। जबकि इस कार्य को तीन चरणों में पूरा होना था। आधी-अधूरी सुरक्षा दीवार बनने से कटाव तो रुका है, लेकिन भूस्खलन पर रोक नहीं लग पाई है। भूस्खलन से विवि के गेस्ट हाउस के समीप से गुजर रहा संपर्क मार्ग कटता जा रहा है। वहीं स्टेडियम और पुराने मार्ग से भी मिट्टी-पत्थर गिर रहे हैं। स्टेडियम क्षतिग्रस्त होने से विवि की खेल गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। विवि को किक्रेट, फुटबाल व एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं कराने के लिए अन्य महाविद्यालयों के मैदान का प्रयोग करना पड़ रहा है।
तीन चरणों में बननी थी 40 मीटर ऊंची दीवार
श्रीनगर। सुरक्षा दीवार को स्टेडियम के समान पहुंचाने के लिए 60 करोड़ की जरूरत है। दीवार का निर्माण तीन चरणों में होना है। स्थिति यह है कि यूजीसी ने प्रथम चरण में लगभग 28 करोड़ 71 लाख रुपये के सापेक्ष 20 करोड़ रुपये दिए। विवि ने बैंक खातों में अर्जित 6 करोड़ की राशि भी कार्यदायी संस्था को दे दी। विवि ने सीपीडब्लूडी के अभी 2 करोड़ 71 लाख चुकाने हैं।
यूजीसी के साथ इस संबंध में कई बार पत्राचार होने के बाद भी धनराशि मिल पा रहीे है। विजय नंद बहुगुणा, अधिशासी अभियंता गढ़वाल विवि