सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण दुगड्डा ब्लाक के खूनीगला गांव और सिलाड़ी गांव में लंगूरगाढ़ की बाढ़ का खतरा बना हुआ है। दोनों गांव दो वर्षों से आपदा का दंश झेल रहे हैं लेकिन, विभाग नदी के कटान को रोकने लिए सुरक्षा दीवार बनाने में बजट का रोना रो रहा है। इसके कारण ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है।
दुगड्डा-लक्ष्मणझूला मार्ग पर हनुमंती के निकट लंगूरगाड़ से सटा हुआ लिसाड़ी गांव 2014 से आपदा से प्रभावित है। लंगूरगाड़ नदी में सुरक्षा दीवार नहीं बनाए जाने से नदी का प्रवाह गांव की ओर हो गया जिससे लिसाड़ी की कृषि भूमि व बागवानी नदी में समा गई। उस दौरान ग्रामीणों को घर छोड़कर सड़क में रात बितानी पड़ी थी।
प्रशासन और विभाग ने मौके का मुआयना कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थित जस की तस है। विभाग ने सुरक्षा दीवार लगाना तो दूूर नदी के प्रवाह को भी मोड़ने का प्रयास नहीं किया।
ग्रामीण हरिप्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, पार्वती देवी, पूनम देवी, प्रेमलाल डोबरियाल ने सिंचाई विभाग पर गांव की अनदेखी का आरोप लगाया कहा कि वे पिछले दो वर्षों से नदी में बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन ग्रामीणों की कोई सुनने वाला नहीं है। विभाग को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
सिंचाई विभाग दुगड्डा के अवर अभियंता कुलदीप पाल ने बताया कि गांव की सुरक्षा के लिये बाढ़ सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा है। बजट मिलने पर कार्य शुरू किया जाएगा।