शहर से सटे काशीरामपुर गांव में रविवार सुबह घुसे एक गुलदार ने लोगों को पूरे दिन दहशत में रखा। डर के मारे लोग घरों में घुस गए। लोगों की जान सांसत में रही। सूचना पर पुलिस, प्रशासन और वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब सात घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में जैसे ही गुलदार को ट्रेंकुलाइज कर जाल में फंसाने का प्रयास किया गया, गुलदार ने जाल फाड़कर दो वन कर्मियों को जख्मी कर दिया और एक घर में घुस गया। घर के अंदर परिवार और बच्चों को बचाने के लिए शिकारी ने आत्मरक्षा में गुलदार को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। गुलदार के मरने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे उत्तर-प्रदेश के जंगलों से होते हुए एक गुलदार कौड़िया, देवीनगर की आबादी से होते हुए काशीरामपुर की शिवालिक नगर कॉलोनी में जा घुसा। यहां गुलदार एक गोशाला में घुसा तो लोगों ने शोर मचाकर उसे भगाया। आबादी में गुलदार के नजर आने पर लोगों के होश उड़ गए। गांव में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी छतों पर खड़े होकर गुलदार को देखने लगे। भीड़ देखकर गुलदार गेहूं के खेतों में जा छिपा। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
लैंसडौन के डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी की अगुवाई में वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने, ट्रेंकुलाइज करने के लिए देहरादून, हरिद्वार और रामनगर के साथ ही कालागढ़ टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञ बुलवाए। लैंसडौन और जयहरीखाल से डॉ. प्रशांत सिंह और जॉय हुकिल के शिकारी दल भी मौके पर बुलवा दिया गया। चारों ओर से घनी आबादी और लोगों की जान को बढ़ता खतरा भांपते हुए वन विभाग ने शाम तीन बजे गुलदार को बेहोश करने के लिए ट्रेंकुलाइज किया और उसे जाल में फंसाने का अभियान चलाया। जैसे ही गुलदार के ऊपर जाल पड़ा, वह दहाड़ते हुए जाल को फाड़ निकला। इस दौरान वहां मौजूद सैकड़ों लोगों में अफरातफरी मच गई। गुलदार ने दो वन कर्मियों वन आरक्षी धीरेंद्र सिंह और नरेंद्र सिंह पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया।
देखते ही देखते गुलदार पास के एक घर में घुस गया, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद शिकारी जॉय हुकिल को हालात समझते देर न लगी। परिवार और बच्चों की जान को बचाने के लिए गुलदार को मौके पर ढेर कर दिया गया। गुलदार को जिंदा पकड़ने के सभी प्रयास विफल हो गए। लोगों का कहना था कि गुलदार को गोली न मारी जाती तो वह कई लोगों को अपना शिकार बना लेता।