जयहरीखाल और इससे सटे इलाके में एक बार फिर से गुलदार का खतरा पैदा हो गया है। बुधवार सुबह वेदीखाल के पास के गांव मेरुवा में सुबह सवा चार बजे गुलदार के हमले से जहां पूरे इलाके में दशहत बनी हुई है, वहीं वन विभाग ने पूरा उजाला होने के बाद ही घरों से बाहर निकलने की सलाह ग्रामीणों को दी है। यह क्षेत्र जयहरीखाल के उन गांवों के पास है, जहां ढाई महीने पहले गुलदार दो बच्चियों को निवाला बना चुका है और कई लोगों को हमलाकर जख्मी कर चुका है।
वेदीखाल के पास गांव में मेरुवा गांव में गुलदार के वृद्धा को निवाला बनाए जाने के बाद से क्षेत्र में ढाई महीने पहले की गुलदार की दहशत ताजा हो गई। ग्रामीण बुधवार की घटना को खतरनाक मान रहे हैं। प्रधान सुमित्रा देवी और पूर्व प्रधान माणिकलाल भदोला का कहना है कि सुबह चार बजे ग्रामीण उठकर दिनचर्या में लग जाते हैं। गर्मियों के सीजन में भी यदि सुबह गुलदार आबादी में हमला करे तो बात खतरनाक और चिंताजनक है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार पर नजर रखने, उसके पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। कहा कि इस घटना के बाद गुलदार का हमला होता है कि लोगों में आक्रोश बढ़ेगा। गुलदार के आतंक के चलते ग्रामीण अब सुबह घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्र में रात को शौच के लिए घर के आंगन में निकलना तक खतरे से खाली नहीं रह गया है।
गत दो माह पूर्व ही मेरुवा के नजदीकी ग्राम ओड़ल में गुलदार ने पांच वर्षीय बच्ची गौरी और इसके बाद जलेथा में पांच वर्षीय आरूषि को निवाला बनाया था। इसके बाद कई लोगों पर हमला कर गुलदार जख्मी कर चुका है। ढाई महीने बाद इस इलाके में फिर से गुलदार के सक्रिय होने से ग्रामीणों में भय पैदा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता विमल बौठियाल का कहना है कि जयहरीखाल के इलाके में गुलदारों की चहलकदमी लगातार बढ़ती जा रही है।
बहू ने गुलदार के मुंह से छुड़ाया सांस को, लेकिन बचा न सकी
दुगड्डा। मेरुवा गांव में तड़के सवा चार बजे जैसे ही गुलदार ने सत्तर वर्षीय वृद्वा श्यामा देवी पर हमला किया, वैसे ही उनकी चीख से जागी बहू हेमलता ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर बाहर निकले पड़ोसी अरविंद के साथ हेमलता ने बहू को गुलदार के मुंह से खींचना प्रारंभ किया। थोड़ी देर तक चली खींचातान में एक ओर गुलदार वृद्धा का गला दबाकर उसे दूर ले जाने के लिए घसीट रहा था तो दूसरी ओर हेमलता सास को बचाने के लिए गुलदार से संघर्ष कर रही थी। हेमलता ने गुलदार के मुंह से सास को छुड़ा तो लिया, लेकिन तब तक वह मर चुकी थी।