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जलेथा का गुलदार ढेर, पौखाल का पिंजड़े में कैद

Sun, 06 Mar 2016 06:06 PM IST
अमर उजाला/लैंसडौन
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पिंजरे में गुलदार में - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जयहरीखाल विकासखंड में दो मासूमों को निवाला बनाने के बाद जनाक्रोश झेल रहे वन विभाग ने जहां शनिवार की रात एक गुलदार को पिंजड़े में कैद कर लिया, वहीं जंगल से आबादी में जाते हुए दूसरे गुलदार को वन विभाग की शिकारी टीम ने अपनी गोली से ढेर कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार को यदि नहीं मारा जाता तो वह फिर से किसी मासूम को अपना निवाला बना लेता।
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जलेथा में घर के आंगन से साढ़े चार साल की बच्ची को निवाला बनाने वाला गुलदार शनिवार की रात फिर से उसकी घर की ओर पहुंच गया था। घर से करीब सत्तर मीटर की दूरी पर स्थित डा. प्रशांत सिंह की अगुवाई वाली टीम ने उसकी पहचान करने के बाद उसे मौके पर ढेर कर दिया। गुलदार के ढेर होने की खबर से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। दूसरी टीम ने पीड़ित परिवार के घर के पास मचान बनाकर मोर्चा संभला हुआ था। गुलदार को ढेर करने वाली टीम में शामिल डा. प्रशांत सिंह के साथ सुधीर राघव, जहीर बख्शी, डिप्टी रेंजर अनुराग जुयाल तथा महावीर शामिल थे।

आपरेशन टीम के सदस्यों को रात सवा दस बजे सड़क के पास गुलदार का मूवमेंट नजर आया। गुलदार ठीक उसी दिशा में जा रहा था कि जहां उसने दो दिन पूर्व अबोध बालिका के निवाला बनाया था। जलेथा में शिकारी दल की गोली से ढेर हुआ गुलदार मामा थी। उसकी उम्र करीब सात से आठ साल के बीच की थी। पोस्टमार्टम के बाद गुलदार को जलाकर नष्ट कर दिया गया।
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उधर, वन विभाग के पौखाल स्थित पिंजड़े में शनिवार रात करीब आठ बजे एक गुलदार के फंसने की सूचना मिलते ही मौके पर वन विभाग की टीम पहुंच गई। एसीएफ एमके बहुखंडी ने बताया कि पिजड़े में कैद गुलदार की उम्र करीब सात से आठ साल की है। वह मादा गुलदार है। रात को ही गुलदार को कोटद्वार भिजवा दिया गया। जहां से उसे रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।

जयहरीखाल क्षेत्र में सक्रिय थे मादा गुलदार
लैंसडौन। जयहरीखाल क्षेत्र में दो बच्चियों के निवाला बनाने वाले गुलदार मादा थे। क्षेत्र में दो पिंजड़े में फंसे, एक गोली से ढेर हुआ गुलदार भी मादा थे। आपरेशन गुलदार में शामिल प्रसिद्ध शिकारी प्रशांत सिंह और जॉय हुकिल का कहना है कि मादा गुलदार की रेंज कम होती है, जबकि नर गुलदार की रेंज लंबी।

उनका कहना है कि गढ़वाल के जंगलों में भोजन की कमी के चलते ये गुलदार आबादी का रुख कर रहे हैं। जिसकी वजह से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने लगे हैं।  डा. प्रशांत सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने सबसे पहले वर्ष 2013 में बैरोड़ी गांव के  आदमखोर को ढेर किया था। टीम ने अब तक पांच गुलदारों को मौत के घाट उतारा  है। जिनमें फूलसैंण, एफआरआई देहरादून, देवप्रयाग के बाद पांचवां जलेथा के  गुलदार को मारने में सफलता पाई।
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