कोटद्वार। खेलो इंडिया, बढ़ो इंडिया का नारा देने वाली सरकार राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार फुटबाल मैदान के निर्माण के लिए 26 सालों में खोह नदी से सटी भूमि तक उपलब्ध नहीं करा पाई है। ऐसे में कैसे खेलेगा और बढ़ेगा इंडिया। स्थानीय खेल प्रेमियों का आरोप है कि वे वर्षों से मानकों के अनुरूप फुटबाल मैदान के निर्माण के लिए खोह नदी से सटी भूमि भी स्टेडियम के साथ उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो रही है।स्टेडियम बनने से पहले नगर में खेल गतिविधियां बदरीनाथ मार्ग स्थित नुमाइश ग्राउंड में होती थीं। इस मैदान में जीजीआईसी स्कूल भवन के निर्माण के बाद खेल गतिविधियां सेना के आमपड़ाव स्थित मैदान में आयोजित होने लगीं। 1987 में पनियाली गदेरे में आई बाढ़ से पूरा मैदान खराब हो गया।
तब तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष शशिधर भट्ट के नेतृत्व में खेल प्रेमियों ने स्टेडियम के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आंदोलन किया। जिस पर जिला प्रशासन की ओर से गाड़ीघाट में स्टेडियम के लिए करीब 6.83 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई। खेल प्रेमियों की मांग पर तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोहरा ने 1993 में इस भूमि पर स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की। शासन की ओर से स्टेडियम के निर्माण के लिए दो किस्तों में करीब 124.6 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई।
वर्ष 1998 में राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम के भवन का निर्माण हुआ। स्टेडियम के मुख्य भवन का निर्माण मैदान के बीच में होने से मुख्य मैदान की चौड़ाई महज 53 मीटर रह गई। जिससे अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार मैदान में 400 मीटर का एथलेटिक्स ट्रैक का निर्माण नहीं हो सका। मानक के अनुसार मैदान की चौड़ाई 176 मीटर गुणा 84 मीटर होनी चाहिए।
स्टेडियम में मानकों के अनुसार फुटबाल का ग्राउंड भी विकसित नहीं हो सका। फेडरेशन इंटरनेशनेल द फुटबाल एसोसिएशन (फीफा) के अनुसार ए लेविल के फुटबाल ग्राउंड के लिए मैदान की चौड़ाई 105 मीटर गुणा 68 मीटर होनी चाहिए। क्षेत्र के खेल प्रेमी वर्षों से खोह नदी से सटी सरकारी भूमि पर सुरक्षात्मक कार्य कराकर मैदान की चौड़ाई बढ़ाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
.
पूर्व में शासन व जिला प्रशासन को इस संबंध में कई पत्र भेजे गए थे, लेकिन अभी तक मैदान की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। इससे क्षेत्र के खेल प्रेमियों को खासी निराशा है।
- अतुल भट्ट, सचिव एवं पूर्व खिलाड़ी कोटद्वार स्पोर्ट्स क्लब।
.
स्टेडियम के मैदान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाने के लिए स्टेडियम से लगी खोह नदी से सटी भूमि को स्टेडियम परिसर में मिलाने के लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
- संदीप डुकलान, जिला क्रीड़ाधिकारी पौड़ी।