दुगड्डा/कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में साल के पेड़ों के सूखने का सिलसिला जारी है। रेंज के रिवाली कक्ष क्षेत्र में बड़ी संख्या में साल के पेड़ प्रभावित बताए जा रहे हैं। वनकर्मियों की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे प्रभागीय वनाधिकारी को भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट को देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को भेज दिया गया है। अब इस मामले की जांच एफआरआई करेगा।
जानकारों के अनुसार साल के पेड़ों को हॉब्लो (बोरर) कीट नुकसान पहुंचाता है। मादा कीट जून-जुलाई में पेड़ की बाहरी छाल पर अंडे देती है। अंडों से निकलने वाले लार्वा पेड़ में छेद कर अंदर की लकड़ी को अपना भोजन बनाते हैं जिससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है।
कीट नियंत्रण के लिए ट्री ट्रैप और मुंडमाला जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। वहीं साल का पेड़ इमारती लकड़ी के साथ रेजिन के लिए भी महत्वपूर्ण है जिसका उपयोग धूप और औषधीय कार्यों में किया जाता है। दुगड्डा के प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान साल के पेड़ों के नीचे लकड़ी का बुरादा मिला है। पेड़ों के तनों और ऊपरी हिस्सों में कीटों के छेद पाए गए हैं जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूख रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी दुगड्डा रमेश चंद्र सिंह नेगी ने बताया कि साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के माध्यम से एफआरआई देहरादून भेजी गई है। अब एफआरआई साल के पेड़ों के सूखने के कारण और कीट के प्रकोप की स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा।