पारा चढ़ते ही क्षेत्र के जंगल धधकने लगे हैं। इन दिनों जहां एक ओर लैंसडौन रेंज में फुलणसैंण और सीला गांव के बीच के जंगल धधक रहे हैं, वहीं दुगड्डा रेंज में भी बोरगांव और इसके आसपास के जंगल में भी आग लगी हुई है। जंगलों में आग लगने से अब तक आठ हेक्टेयर से अधिक जंगल खाक हो चुके हैं। जबकि कई स्थानों में अब भी आग फैली हुई है।
पिछले दो दिन से वन प्रभाग की लैंसडौन रेंज की सीमा पर फुलणसैंण सीला मोटर मार्ग के पास के जंगल धधक रहे हैं। सड़क के किनारे सोमवार शाम से जंगलों में आग लगी हुई है। वन विभाग की ओर से दावानल को बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पूर्व विभाग की ओर से कंट्रोल बर्निंग के तहत सड़क के दोनों ओर सूखी पत्तियों को भी जलाया गया था।
उधर, दुगड्डा रेंज के अंतर्गत वन पंचायत बोरगांव और इसके आसपास के जंगलों में भी पिछले कईं दिन से आग लगी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। आग प्रभावित क्षेत्रों से कुछ दूरी पर बोरगांव, सलाणी, पुरानकोट आदि गांव हैं। यदि आग पर सही समय पर काबू नहीं पाया गया तो आग आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकती है।
लैंसडौन वन प्रभाग में अब तक वनाग्नि की 17 घटनाएं हो चुकी हैं। जिसमें कोटद्वार की छह घटनाओं में 1.5 हेक्टेयर, दुगड्डा की तीन घटनाओं में एक हेक्टेयर और लालढांग रेंज में वनाग्नि की 8 घटनाओं में 5.75 हेक्टेयर जबकि लैंसडौन में 0.5 हेक्टेयर जंगल खाक हो चुके हैं। मटियाली रेंज के रेंज अधिकारी बीडी जोशी ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सचल दल तैनात किया गया है।
दुगड्डा और लैंसडौन रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में नापखेत ज्यादा है। ग्रामीण झाड़ियों पर आग लगा रहे हैं। जो आरक्षित वन क्षेत्र तक पहुंच रही है। सोमवार को दोनों रेंजों में 13 जगहों में आग लगी थी, जिसमें से 12 जगहों पर नापखेत में आग की घटनाएं हुई। एसडीओ समेत पूरा स्टाफ वनाग्नि की घटनाएं रोकने में जुटा हुआ है।
- दिनकर तिवारी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार।