थलीसैण के जंगलों में सात गुलदारों को मौत के घाट उतारने के बाद उनकी खालों और हड्डी की तस्करी के मामले में एक और वन दारोगा एवं वन रक्षक पर गाज गिर गई है। विभाग की ओर से की जा रही मामले की जांच को गंभीरता से न लेने और जांच कार्य में सहयोग न करने पर विभाग ने चौरीखाल के वन दारोगा और वन रक्षक को निलंबित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को कोटद्वार पुलिस ने कोटद्वार से वन्य जीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह को दबोचा था। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार करते हुए उनसे सात गुलदार की खालें भी बरामद की थीं। पूछताछ के दौरान बताया गया था कि गुलदारों की ये सभी खालें थलीसैण के जंगलों से लाई गई हैं।
मामला प्रकाश में आने के बाद वन विभाग ने सक्रिय होकर इसकी जांच शुरू की थी। विभाग ने इस मामले में पहले छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। बाद में उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद 29 जनवरी को विभाग ने त्रिपालीसैण के वन दरोगा को निलंबित कर दिया था। अभी विभाग इस मामले में कोई अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। गढ़वाल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि विभाग की ओर से की जा रही जांच को गंभीरता से न लेने और मामले में लापरवाही बरतने पर उन्होंने शनिवार को चौंरीखाल के एक और वन दरोगा कुलदीप रावत और वन रक्षक जसवंत सिंह को भी निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।